कांगड़ा के नाजुक सियासी हालात की नब्ज देखने के लिए दिल्ली हाईकमान ने शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दुष्यंत गौतम को धर्मशाला भेजा। दुष्यंत गौतम के आने पर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार भी शुक्रवार को धर्मशाला पहुंच गए। हालांकि, सुरेश भारद्वाज शनिवार को धर्मशाला में विभागीय बैठक भी लेंगे। सदस्यता अभियान के बहाने दुष्यंत कांगड़ा में मचे सियासी घमासान और धर्मशाला उपचुनाव से पहले की स्थिति की रिपोर्ट बनाकर दिल्ली में हाईकमान को सौंपेंगे।
कहीं कांगड़ा को बैकफुट पर करने की साजिश तो नहीं
राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि कांगड़ा की लीडरशिप को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। किशन कपूर और सरवीण चौधरी को सरकार में विभाग ही ऐसे मिले जिस वजह से एक दूसरे के क्षेत्रों में राजनीतिक दखल बढ़ने से विरोध हुआ। रमेश धवाला और इंदु गोस्वामी के विस क्षेत्रों में राजनीतिक दखल की वजह से प्रदेश नेतृत्व निशाने पर आ गया। कांगड़ा जिला के ज्वालाजी से पवन राणा सियासी रूप से ज्यादा सशक्त हुए तो वह भी अपनों के निशाने पर आ गए।
कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री किशन कपूर अचानक दिल्ली भेज दिए गए। इंग्लैंड जाते ही स्मार्ट सिटी और टीसीपी में सरवीण की शक्तियों पर कैंची चला दी गई। जिला का अगुवा नेता बनने चले विपिन परमार अपने मंत्रालय में घोटालों की वजह से विरोधियों के निशाने पर आ गए। कुल मिलाकर नेतृत्व की क्षमता वाले कांगड़ा जिला के सभी नेता राजनीतिक हाशिये पर पहुंच गए।