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कांगड़ा भाजपा में बढ़ सकता है घमासान, धवाला और इंदु के संपर्क में नाराज चल रहे कई नेता

Sat, 27 Jul 2019 01:28 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
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सांकेतिक तस्वीर
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कांगड़ा भाजपा में मचा सियासी घमासान आने वाले दिनों में और रौद्र रूप ले सकता है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो रमेश धवाला और इंदु गोस्वामी के ‘नाराज गुट’ में कांगड़ा के और बड़े नेता भी शामिल हो गए हैं। यह गुट आने वाले दिनों में बड़ा सियासी विस्फोट करने की तैयारी में है। 29 और 30 जुलाई को दिल्ली में भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी की निदेशक मंडल की बैठक के बहाने इंदु गोस्वामी हाईकमान से मिलकर प्रदेश नेतृत्व की शिकायत कर अगली रणनीति को अंजाम देंगी।

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दिल्ली से आने के बाद इंदु प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रही हैं। सीएम से 15 दिन का आश्वासन मिलने के बाद रमेश धवाला ज्वालामुखी से आगामी रणनीति बना रहे हैं। धवाला से नाराज नेता लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। दिल्ली हाईकमान से मिलने के बाद संगठन मंत्री पवन राणा कार्रवाई की नई रणनीति बना रहे हैं। खास बात यह है कि नाराज गुट के कुछ लोग पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से भी संपर्क साधने की कोशिश में लगे हैं।

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कांगड़ा के नाजुक सियासी हालात की नब्ज देखने के लिए दिल्ली हाईकमान ने शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दुष्यंत गौतम को धर्मशाला भेजा। दुष्यंत गौतम के आने पर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार भी शुक्रवार को धर्मशाला पहुंच गए। हालांकि, सुरेश भारद्वाज शनिवार को धर्मशाला में विभागीय बैठक भी लेंगे। सदस्यता अभियान के बहाने दुष्यंत कांगड़ा में मचे सियासी घमासान और धर्मशाला उपचुनाव से पहले की स्थिति की रिपोर्ट बनाकर दिल्ली में हाईकमान को सौंपेंगे। 

कहीं कांगड़ा को बैकफुट पर करने की साजिश तो नहीं
राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि कांगड़ा की लीडरशिप को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। किशन कपूर और सरवीण चौधरी को सरकार में विभाग ही ऐसे मिले जिस वजह से एक दूसरे के क्षेत्रों में राजनीतिक दखल बढ़ने से विरोध हुआ। रमेश धवाला और इंदु गोस्वामी के विस क्षेत्रों में राजनीतिक दखल की वजह से प्रदेश नेतृत्व निशाने पर आ गया। कांगड़ा जिला के ज्वालाजी से पवन राणा सियासी रूप से ज्यादा सशक्त हुए तो वह भी अपनों के निशाने पर आ गए।

कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री किशन कपूर अचानक दिल्ली भेज दिए गए। इंग्लैंड जाते ही स्मार्ट सिटी और टीसीपी में सरवीण की शक्तियों पर कैंची चला दी गई। जिला का अगुवा नेता बनने चले विपिन परमार अपने मंत्रालय में घोटालों की वजह से विरोधियों के निशाने पर आ गए। कुल मिलाकर नेतृत्व की क्षमता वाले कांगड़ा जिला के सभी नेता राजनीतिक हाशिये पर पहुंच गए।
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