इससे ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पडे़गा। बिजली मापने के लिए जगह-जगह इलेक्ट्रानिक उपकरणों और बिजली के फीड़रो के अलग-अलग करने का खर्चा भी उपभोक्ताओं को वहन करना पडेगा।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक व अन्य राजस्व वाले क्षेत्र निजी हाथों मे चले जाएंगे। इसका भी सीधा असर प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जहां बडे़ उपभोक्ताओं को उनकी सुविधा अनुसार बिजली मिलेगी वहीं अन्य उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति में दी जा रही सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित होंगी और
विद्युत दरें बढे़गी। महासचिव हीरालाल वर्मा ने कहा कि बिजली बोर्ड के विघटित होकर निजी हाथों में जाने से जहां कर्मचारियों की सेवा शर्तें प्रभावित होंगी वहीं बोर्ड पेंशनरों व कर्मचारियों की पेंशन व सेवानिवृत्ति पर मिलने बाले वित्तीय लाभ जैसी समाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
इस अवसर पर देवेंद्र शर्मा, सितेंद्र वर्मा, रोशन कुमार, भोपेद्र शर्मा, बच्चन नेगी, ज्ञान चद, अशोक भारद्वाज, ओपी जस्टा सहित कई अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
- उत्तराखंड की तर्ज पर कर्मचारियों की संख्या को कम करने को गठित कमेटियां रद्द की जाएं।
- 48 श्रेणी के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।
- बोर्ड में ऑउटसोर्स पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति बनाई जाए।
- लंबित करुणामूलक के मामलों को निपटाया जाए।
- बोर्ड में मानव रहित विद्युत उपकेंद्रों के लिए 350 पदों का सृजन किया जाए।