संयुक्त कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी(फाइल)
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पंजाब की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान और लंबित भत्ते दिलाने के लिए गठित संयुक्त कर्मचारी महासंघ की बैठक सोमवार को शिमला के कालीबाड़ी हॉल में हुई। इसमें फैसला लिया गया कि 20 फरवरी को कर्मचारी जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। उपायुक्तों के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजे जाएंगे। 21 फरवरी को कांगड़ा, 27 को बिलासपुर, 28 को हमीरपुर, 1 मार्च को ऊना, 6 मार्च को सोलन, 7 मार्च को सिरमौर और 11 मार्च को कुल्लू में विरोध स्वरूप महासम्मेलन होंगे।
सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन होंगे और शिमला में इनका समापन होगा। कहा गया कि सरकार ने 15 दिन के भीतर कर्मचारियों की मांगें नहीं मानीं तो अगली रणनीति तैयार की जाएगी। संयुक्त महासंघ विधानसभा का घेराव भी करेगा। संघ ने दावा किया कि 25 संगठनों के साथ बनाए संयुक्त महासंघ में 41 कर्मचारी संघ जुड़ चुके हैं। महासंघ की दूसरी बैठक में 41 कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने रणनीति बनाई है। इसमें राज्य के निगमों और बोर्डों के कर्मचारी संगठनों के नेता भी मौजूद रहे।
महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और मुख्य सलाहकार ने कहा कि सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था। सरकार ने जब कोई कदम नहीं उठाया तो संयुक्त महासंघ को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा है। पंजाब तर्ज पर संशोधित वेतनमान और भत्ते देने के लिए कर्मचारी सरकार पर दबाव डालेंगे। सरकार ने संयुक्त महासंघ अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान को कर्मचारियों की आवाज उठाने पर कारण बताओ नोटिस देकर कर्मचारियों के उत्पीड़न की शुरुआत कर दी है। बैठक में महासचिव हीरा लाल वर्मा, मुख्य सलाहकार विनोद ठाकुर, मुख्य संगठन सचिव कुलदीप खरवाड़ा, खेमेंद्र गुप्ता, कोषाध्यक्ष शमशेर ठाकुर, अरविंद मेहता, एलडी चौहान, नरेश ठाकुर, अरुण गुलेरिया, विनोद शर्मा, एमआर बरागटा, चितरंजन महंत, चमन ठाकुर, तिलक, रमेश ठाकुर भूपेश ठाकुर आदि मौजूद रहे।