राजनीतिक विज्ञान को ग्रीन एनर्जी से जोड़ने की वकालत संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के राजनीतिक विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए विश्व शांति और कूटनीतिक संतुलन से जुड़े मुद्दों पर शोध करने की आवश्यकता है।
कुलपति ने कहा कि राजनीतिक विज्ञान जैसे विषयों को अब ग्रीन एनर्जी और आपदा प्रबंधन जैसे समकालीन वैश्विक मुद्दों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने घोषणा की कि इन क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शोध करने वाले शोधार्थियों को विदेशों में शोध एवं प्रशिक्षण के अवसर प्रदान किए जाएं। प्रो. सिंह ने बताया कि पारंपरिक युद्ध का स्वरूप अब बदल चुका है और यह तकनीकी तथा गैर-पारंपरिक रूप ले चुका है। उन्होंने 6 जी तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को आधुनिक युद्ध के अदृश्य हथियारों में से एक बताया। कुलपति ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य यूएस-चीन, भारत-पाकिस्तान, रूस-यूक्रेन और इस्राइल-फिलिस्तीन के बीच बढ़ते बहुपक्षीय संघर्षों की ओर संकेत करता है। अधिष्ठाता अध्ययन प्रोफेसर बीके शिवराम ने विशिष्ट अतिथि के रूप में विचार साझा किए। मुख्य वक्ता प्रोफेसर कमल किंगर ने सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए तीसरी दुनिया के प्रमुख देशों को स्थायी सदस्यता देने का सुझाव दिया। इन सत्रों की अध्यक्षता डॉ. बीआर ठाकुर, डॉ. मीरा चौहान और डॉ. योगराज ने की। समापन सत्र में पूर्व कुलपति आचार्य राजेंद्र सिंह चौहान ने विभाग को सार्थक आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन शोधकर्ताओं को नई दिशा और दृष्टि प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. आभा खीम्टा ने सभी सत्रों की रिपोर्ट प्रस्तुत की और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।