बर्फबारी के दौरान रोहतांग दर्रा से पैदल आवाजाही करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए मढ़ी और कोकसर में तैनात बचाव चौकियों को हटा दिया है। दोनों चौकियों में तैनात जवान समेत अन्य कर्मचारी शुक्रवार दोपहर बाद लौट गए हैं।
रोहतांग दर्रा बहाल होने के बाद प्रशासन ने दोनों चौकियों को हटाने का निर्णय लिया है। दोनों बचाव चौकियों में करीब 18 लोगों को तैनात किया गया था। लाहौल-स्पीति जिला प्रशासन और अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान मनाली के सौजन्य से हर वर्ष 15 नवंबर से 31 दिसंबर और मार्च के बाद लोगों की सुरक्षा को लेकर बचाव चौकियों की स्थापना की जाती है।
उपायुक्त लाहौल-स्पीति केके सरोच ने 15 मई से इन चौकियां को अब बंद करने का फैसला लिया है। इस वर्ष प्रशासन ने 6 मार्च से रोहतांग के दोनों छोर पर बचाव दल तैनात किए थे। लेकिन कोविड-19 की महामारी के चलते इस बार 6 मार्च से 24 अप्रैल तक केवल 15 यात्री रोहतांग दर्रा पैदल पार कर लाहौल पहुंचे हैं।
लॉकडाउन के बीच कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा की पहल पर सरकार की अनुमति के बाद 25 अप्रैल से लाहौल के किसानों को लाहौल आने की इजाजत दी गई। कोकसर बचाव चौकी के प्रभारी पवन ठाकुर ने बताया कि 25 अप्रैल को मनाली से राहनीनाला तक लाहौल के किसान टैक्सियों में सफर कर रोहतांग दर्रा तक पैदल सफर कर लाहौल पहुंचे। 28, 29 और 30 अप्रैल को रोहतांग दर्रा बहाल होने के बाद तक चार दिनों में 1551 किसान लाहौल पहुंचे। इस बीच 91 लोग मनाली रवाना हुए।
सभी वाहनों की आवाजाही के लिए रोहतांग दर्रा खोल दिया है। लिहाजा प्रशासन ने कोकसर और मढ़ी स्थित बचाव चौकियों को 15 मई से बंद करने का निर्णय लिया है।
-केके सरोच, उपायुक्त, लाहौल-स्पीति