बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण से गोबिंद सागर झील और सहायक नालों पर कंपनी की ओर से बनाए गए काफर डैम की स्टेटस रिपोर्ट देने के लिए परियोजना निदेशक एनएचएआई को एसडीएम सदर ने 30 सितंबर को छठा रिमाइंडर जारी किया है। जारी पत्र संख्या बीएलएस-एसडीएम पेशी-3(28)/2019-8222 में एसडीएम सदर ने एक बार फिर परियोजना निदेशक से साल 2019 से विचाराधीन काफर डैम और अवैध डंपिंग के विषय पर सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा है ताकि किसी भी नतीजे पर पहुंचा जा सके।
पत्र में लिखा है कि उपरोक्त विषयों पर एनएचएआई की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। कीरतपुर-नेरचौक निर्माण कंपनी ने भू-मालिकों, वन भूमि, पर्यावरण, मत्स्य, गोबिंदसागर झील और सहायक नालों को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। उपायुक्त बिलासपुर ने एसडीएम सदर की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी के अध्यक्ष एवं एसडीएम सदर ने फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति से मुहाल गरा से बलोह तक अवैध ब्लास्टिंग, डंपिंग, कटिंग से हुए नुकसान का ब्योरा मांगा गया था।
वहीं गोबिंद सागर झील और सहायक नालों पर दलदल पर पुलों का निर्माण करने के लिए सूखी मिट्टी डालकर काफर डैम बनाए गए हैं। इसके बारे में भी परियोजना निदेशक एनएचएआई से रिपोर्ट मांगी थी। पांच रिमांइडर जारी होने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं गोबिंद सागर झील में काफर डैम बनाने के लिए मिट्टी डंप करने का सिलसिला लगातार जारी है। आठ साल में बनाए गए सभी काफर डैम झील में समा गए। इससे मत्स्य और भाखड़ा बांध को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। एसडीएम सदर सुभाष गौतम ने रिमांडर जारी करने की पुष्टि की है।