दलील है कि महिला ने अभिनेता को ब्लैकमेल करने के इरादे से यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करवाई है। कथित घटना के 47 वर्ष बाद दर्ज इस प्राथमिकी में देरी के कारणों का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
जितेंद्र की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि शिकायत में न तो शिमला में की गई फिल्म की शूटिंग के नाम का और न ही शिमला के उस होटल के नाम का उल्लेख किया गया है, जहां यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया।
इसके अलावा उन दो सह अभिनेताओं के नाम भी प्राथमिकी में नहीं हैं, जिनका जिक्र शिकायत में किया गया है।
प्रार्थी के अनुसार उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं, इसलिए यह एफआईआर रद्द की जाए। वकील की दलीलों पर फिलहाल प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में आगामी जांच पर रोक लगा दी है।