नदी-नालों के किनारे बने मकानों को खाली कराने के आदेश
भारी बारिश और बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नदी से 500 मीटर और खतरनाक नालों से 200 मीटर के दायरे में आने वाले संवेदनशील मकानों को तुरंत खाली कराया जाए।
राहत शिविरों की तैयारी: घर छोड़ने वाले प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ उनके लिए तिरपाल और अस्थाई राहत शिविरों की व्यवस्था की जा रही है, जहां भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
चंबा में मची तबाही, 200 श्रद्धालु 9 घंटे फंसे रहे
चंबा जिला प्रशासन ने मणिमहेश जाने पर तत्काल प्रभाव से तीन दिन का प्रतिबंध लगा दिया है और हड़सर से आगे किसी भी श्रद्धालु को जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सुरक्षा के लिए जगह-जगह बलों की तैनाती की गई है।
श्रद्धालु फंसे: हड़सर-कुगति मार्ग पर धनोल के पास हुए भारी भूस्खलन के कारण कार्तिक स्वामी मंदिर से लौट रहे करीब 200 श्रद्धालु नौ घंटे तक फंसे रहे। शाम को मार्ग बहाल होने के बाद ही उन्हें निकाला जा सका।
राजमार्ग रहा ठप: बत्ती दी हट्टी और दुर्गठी के पास मलबा आने से चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग रविवार सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक बंद रहा, जिससे दर्जनों वाहन फंसे रहे।
भारी आर्थिक नुकसान: चुराह में चांजू-3 जलविद्युत परियोजना की निर्माण सामग्री बह गई, जबकि वन निगम के करोड़ों रुपये के लकड़ी के स्लीपर भी पानी के तेज बहाव में बह गए। पांगी घाटी में किसानों की मटर की फसल पूरी तरह तबाह हो गई है।
उड़ानें रद्द, पुल पानी में डूबा
खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा है। कुल्लू में एक और कांगड़ा में खराब दृश्यता व मौसम के कारण कुल सात उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। उधर, लाहौल घाटी में चिनाब नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से जोबरंग पुल कई घंटों तक पानी में डूबा रहा, जिससे इस मार्ग पर भी आवाजाही पूरी तरह बाधित रही। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।