बैठक की अध्यक्षता उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने की। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ सदस्यों ने अपने सुझाव दिए हैं, लेकिन किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले कमेटी इसमें रेहड़ी फड़ी वालों और आम लोगों के सुझाव व आपत्तियां भी लेगी। इसके लिए 15 दिन का समय तय किया गया है। कमेटी की अगली बैठक 4 नवंबर को होगी, जिसमें लोगों के सुझावों और अन्य कानूनी पहलुओं पर चर्चा होगी। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 में लागू हुआ है। इस एक्ट में तहबाजारियों को नेम प्लेट लगाने का भी जिक्र है।
वर्ष 2016 में इसमें कुछ संशोधन भी किया गया। जरूरत पड़ने पर इसमें और भी संशोधन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम शिमला में इस एक्ट को लागू किया गया, लेकिन इसे सही तरीके से सिरे नहीं चढ़ाया गया। नगर निगम शिमला आयुक्त ने भी अपने विचार रखे हैंं। सदस्यों ने कहा कि तहबाजारियों को पहचानपत्र जारी किए जाने चाहिए, जिससे उनकी पहचान की जा सके। इसके अलावा तहबाजारियों को लाइसेंस जारी करने पर भी फैसला हुआ है। समिति सदस्य व ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, समिति सदस्य एवं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, समिति सदस्य अनिल शर्मा, सतपाल सिंह सत्ती, रणधीर शर्मा और हरीश जनारथा उपस्थित रहे। इस दौरान प्रधान सचिव शहरी विकास देवेश कुमार, विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा और आयुक्त नगर निगम शिमला भूपेंद्र अत्री भी मौजूद रहे।
पंजीकरण के बाद ही पंचायतों में काम कर सकेंगे मजदूर
अब पुलिस थानों से पंजीकरण के बाद ही मजदूर पंचायतों में जाकर काम कर सकेंगे। ठेकेेदारों के पास, कंपनियों और दुकानों में काम करने वाले मजदूरों को पहचानपत्र बनाना अनिवार्य किया गया है। अगर किसी ठेकेदार के पास काम करने वाले मजदूर का पहचानपत्र नहीं होगा तो कंपनी के मालिक व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई अमर में लाई जाएगी। थानों में मजदूरों और कर्मचारियों को अपना पासपोर्ट साइज, आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज जमा कराने होंगे।
इसके बाद पुलिस मजदूरों की वेरिफिकेशन करेगी। बुधवार को आयोजित ग्राम सभाओं में मजदूरों का पंजीकरण किए जाने पर भी सहमति बनी है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले कई लोग बिना पंजीकरण के सामान बेचते हैं। कोई कंबल कोई कपड़े बेचने वाला लोगों के घरों में जा रहा है। यही नहीं, कई कबाड़ इकट्ठा वाले लोगों के पास कोई पहचानपत्र नहीं होता है। पंचायत प्रधानों को भी इन लोगों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। गांव व पंचायत का कोई भी व्यक्ति इनसे पहचानपत्र की जानकारी ले सकता है।