मत्स्य मंत्री वीरेंद्र कंवर (फाइल फोटो)
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत प्रदेश में आरएएस तकनीक का उपयोग कर भूमि आधारित मछली पालन शुरू किया जाएगा। वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच 15 मछली तालाब स्थापित किए जाएंगे। ठंडे पानी में मछली पालन की नवीनतम एक्वाकल्चर तकनीकों में प्रशिक्षण राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड हैदराबाद में लिया जाएगा। आरएएस तकनीक में पारंपरिक विधि के बजाय नियंत्रित वातावरण में पानी का सीमित उपयोग कर इंडोर टैंकों में मछली पालन किया जाता है।
स्वच्छ पानी की सीमित मात्रा की नियमित आपूर्ति नियंत्रित तापमान पर सुनिश्चित की जाती है। 15 मछली फार्मों में से पांच फार्म ऊना, मंडी, कांगड़ा (पालमपुर और पौंग बांध) और सिरमौर जिलों और दस किन्नौर, सिरमौर, शिमला, मंडी में स्थापित किए जाएंगे। 40 टन प्रति यूनिट वार्षिक मछली उत्पादन सामान्य आरएएस इकाई में प्राप्त किया जाएगा। ठंडे पानी के आरएएस में चार टन और 10 टन उत्पादन क्षमता इकाइयां हैं।
मत्स्य मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि आरएएस प्रौद्योगिकी के तहत सभी 15 मछली फार्मों का संचालन किया जाएगा। राज्य में इसके अंतर्गत हर साल लगभग 270 टन मछली उत्पादन की उम्मीद है। इंद्रधनुष ट्राउट को ठंडे पानी के आरएएस में, जबकि सामान्य पानी में आरएएस पंगासियस, तिलापिया और कामन कार्प को पाला जाएगा।
पांच साल में राज्य में आरएएस प्रौद्योगिकी के तहत नई भूमि आधारित मछली फार्म स्थापित करने के लिए ढांचागत विकास के लिए 5 करोड़ निजी निवेश प्राप्त होगा। मछली फार्म के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन और 40 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाएगी। 50 लाख और 20 लाख यूनिट लागत के आरएएस प्रौद्योगिकी मछली फार्म स्थापित करने का प्रस्ताव है।