काम किया है, काम करेंगे, झूठे वादे नहीं करेंगे। यह राजनीतिक नारा नहीं है। डिजिटल राशन कार्डों पर लिखे इस नारे पर सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्टीकरण दिया कि खाद्य आपूर्ति विभाग की ऐसी कोई मंशा नहीं है कि वह किसी राजनेता के राजनीतिक मिशन का प्रचार करे।
विभाग ने माना कि इन डिजिटल राशन कार्डों में गलतियां हुई हैं, जिन्हें ठीक करने का व्यापक अभियान छेड़ा गया है। विभाग ने हाईकोर्ट को बताया कि हिमाचल में 19 लाख फॉर्मों का डिजिटाजेशन किया है।
यह कार्य मैनुअली हुआ है। डाटा इतना ज्यादा था कि गलतियों की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि राशन कार्ड पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल नहीं हो सकते। कांगड़ा निवासी हंसराज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डिजिटल राशन कार्डों में लिखा गया नारा काम किया है काम करेंगे, झूठे वादे नहीं करेंगे, को राजनीतिक नारा बताते हुए इन्हें सरकारी योजना से हटाने की गुहार लगाई है।
प्रार्थी का आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह के नारों को सरकारी दस्तावेजों में दर्शाना गैरकानूनी है। प्रार्थी ने इन राशन कार्डों में हुई गलतियां बताते हुए कहा कि इनमें उपभोक्ताओं के पिता या पति का उल्लेख ही नहीं है।
इस कारण यदि एक ही व्यक्ति का राशन कार्ड बना हो तो इसका दुरुपयोग कोई भी कर लगा। प्रार्थी ने इन गलतियों को दुरुस्त करने के आदेशों की गुहार भी लगाई है।