द कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन रसील सिंह मनकोटिया ने कहा कि केसीसीबी के वर्तमान निदेशक मंडल का कार्यकाल काले अध्याय के रूप में जाना जाएगा।
इस कार्यकाल में बैंक प्रबंधन पर भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा, घोटाले, भाई-भतीजावाद, रिश्वतखोरी के आरोप पिछले पांच वर्षों से बैंक के अंदर से और बाहर से लगातार लगते रहे हैं। इसके पुख्ता प्रमाण अब सामने आने शुरू हो गए हैं।
31 मार्च, 2017 को पालमपुर सिंडिकेट ब्रांच के मैनेजर सुरेंद्र मोहन पर ऋण संबंधी जो आरोप लगाए गए थे, वे सच साबित हो गए हैं। इसके चलते सुरेंद्र मोहन को गत दिन निलंबित कर दिया है, लेकिन सरेंद्र मोहन को इतना बड़ा रिस्क लेने के लिए किसने उकसाया, उसके पीछे किसका हाथ था, यह भी एक प्रश्न है।
इसका आने वाले समय में खुलासा जनता के सामने आएगा। निदेशक मंडल के इस कार्यकाल में औपचारिकता के बड़े-बड़े ऋण, बैंक भर्तियों में घोटाले, बैंक के धन का शादियों, विदेशी सैर सपाटों, अनावश्यक ब्रांचों एवं जोनल ऑफिसों को खोलना, राजनीतिक आधार पर बैंक ब्रांचों को बंद करना तथा बैंक कर्मचारियों का उत्पीड़न करना आम बात हो गई है।
इसके बारे में समय-समय पर राज्यपाल, रजिस्ट्रार सहकारिता एवं सरकार को बार-बार अवगत करवाया गया। भाजपा सरकार बनते ही हर फैसले की बारीकि से जांच की जाएगी तथा दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।