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जेल में 13 सुरक्षा गार्डों का पहरा, फिर कैसे भाग गए तीन खूंखार कैदी

Thu, 07 Dec 2017 12:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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तीन विचाराधीन कैदियों की फरारी का मामला काफी रहस्यमयी है। कड़ी सुरक्षा के बीच कैदी कैसे फरार हो गए? क्या किसी ने उन्हें भागते हुए नहीं देखा या फिर जब वे ब्लेड से सरिया काट रहे थे तो भी किसी की नजर में नहीं आए? ऐसा कैसे संभव हो सकता है। तीनों आरोपी बैरक नंबर 4 में रखे हुए थे।
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उस बैरक में कुल 28 कैदी हैं। क्या एक भी कैदी को उनकी हरकत नजर नहीं आई। पुलिस कह रही है कि उस समय सभी कैदी सो रहे थे। ऐसी भी चर्चा है कि कुछ कैदियों को पेठा भी खिलाया गया। इसमें कितनी हकीकत है यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा।

मान भी लिया जाए कि जिस समय वे ब्लेड से सरिया काट रहे थे तो इसकी आवाज साथी कैदियों को नहीं सुनाई दी, क्योंकि सभी गहरी नींद में थे। इसके पीछे पुलिस का यह तर्क है कि सरिये को काटने से पहले कैदियों ने उस पर साबुन लगा दिया था, ताकि कोई आवाज न आए। सरिया काटकर बैरक से बाहर निकल गए और वह भी कंबल लेकर।
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जेल की दीवार की ऊंचाई 16 फुट

रात के समय जेल परिसर में 13 सुरक्षा गार्डों की शिफ्टों में ड्यूटी होती है। सभी कैदियों को ताले के भीतर बैरक में बंद किया जाता है। बैरकों में कोई गड़बड़ तो नहीं हो रही, इस पर इन गार्डों की नजर रहती है। जिस जगह यह वारदात हुई, वहां तीन संतरी रात्रि गश्त लगातार कर रहे थे। यह जेल प्रशासन का दावा है।

बावजूद इसके कैदी उनकी नजरों से कैसे बच गए। अब जेल प्रशासन बता रहा है कि जेल की दीवार की ऊंचाई 16 फुट है। उसे लांघना आसान नहीं। पुलिस की थ्योरी कह रही है कि दीवार फांदने के लिए उन्होंने कंबल को रस्सी के तौर पर इस्तेमाल किया। नंगे पांव दीवार कूदकर फरार हो गए।

जेल की सुरक्षा का आलम यह है कि आज तक यहां सीसीटीवी तक नहीं लगे हैं। सीसीटीवी होते तो शायद कई राज खुलते। अब विचाराधीन कैदी कैसे भागे, किसी की मिलीभगत थी या नहीं, यह सब उनकी गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा।

हिमाचल में पहले भी होती रही हैं जेल ब्रेक

यह पहली बार नहीं है कि हिमाचल की किसी जेल से कैदी फरार हुए हों। साल 2010 से लेकर अब तक आधा दर्जन से ज्यादा बार जेल ब्रेक की घटनाएं हुईं और दर्जन भर से ज्यादा कैदी फरार हुए। कुछ मामलों में खुद कैदी वापस आ गए तो कुछ में पुलिस ने फरार कैदियों की गिरफ्तारी कर दोबारा उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया।

हालांकि, आज भी कई ऐसे कैदी हैं, जो हिमाचल की जेलों से फरार होने के बाद आजाद घूम रहे हैं। प्रदेश की कई केंद्रीय और जिला जेलों से कैदियों के भागने का पुराना इतिहास रहा है। कंडा जेल में हुए ताजा जेल ब्रेक से पहले 2015 में हमीरपुर की जेल से पांच कैदियों ने एक साथ भागकर जेल प्रशासन की जेलों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी थी।
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1999 में हुआ था सबसे बड़ा जेल ब्रेक

इनमें कुछ कैदियों को पकड़कर दोबारा जेल भेज दिया गया। इसी तरह धर्मशाला जेल से फरार हुआ कैदी कुछ दिन बाद खुद ही वापस जेल लौट आया। 2011 में कैथू जेल से भी नेपाली कैदी फरार हुए, जिनका आज तक पता नहीं चल सका।

बिलासपुर और कुल्लू से भी नेपाली बंदी फरार हुए और अब तक उनका पता नहीं चल सका है। साल 1999 में नाहन जेल में सबसे बड़ा जेल ब्रेक हुआ था। इसमें सनसनीखेज हत्या के मामले में नाहन जेल में निरुद्घ श्याम दाऊ रेड्डी फरार हो गया था।

फरारी के बाद से आज तक हिमाचल पुलिस व जेल प्रशासन रेड्डी का पता नहीं लगा सकी है। हालांकि, उसका साथी अब भी नाहन जेल में अपनी सजा काट रहा है।
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