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हिमाचल: बीबीएमबी फैसले पर श्रेय लेने की राजनीति न करें सीएम: रणधीर बोले- सभी सरकारों के प्रयासों का परिणाम

Fri, 06 Nov 2026 01:17 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

बीबीएमबी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फैसले का स्वागत करते हुए इसे सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया और मुख्यमंत्री सुक्खू पर एकतरफा श्रेय लेने का आरोप लगाया।

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भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) मामले में सुप्रीम कोर्ट के हिमाचल प्रदेश के हित में आए फैसले का भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है और इससे बिजली में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी सहित अन्य आर्थिक लाभ मिलने की दिशा में रास्ता खुला है। हालांकि उन्होंने कहा कि फैसले की विस्तृत प्रति आने के बाद ही इसके सभी पहलू स्पष्ट हो पाएंगे।

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मुख्यमंत्री एकतरफा श्रेय लेने की राजनीति न करें: रणधीर शर्मा
रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले का एकतरफा श्रेय लेने की राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी का मामला वर्ष 1996 से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रहा है और इस दौरान प्रदेश की सभी सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में हिमाचल के अधिकारों की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सफलता किसी एक सरकार के प्रयासों का परिणाम नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही कानूनी और राजनीतिक कोशिशों का नतीजा है।

शांता कुमार के प्रयासों का भी किया जिक्र
भाजपा विधायक ने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1990 में उनके प्रयासों से हिमाचल को जलविद्युत परियोजनाओं में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली का अधिकार मिला था। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा प्रदेश के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयासरत रही है।

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पीटरहॉफ को पीपीपी मोड पर देने के प्रस्ताव पर उठाए सवाल
रणधीर शर्मा ने पीटरहॉफ अतिथिगृह को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड पर देने के प्रस्ताव की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार प्रदेश की बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है।

उन्होंने पीटरहॉफ की बुकिंग बंद करने के निर्णय और अन्य सरकारी होटलों के निजीकरण की आशंकाओं पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि सरकार सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर क्या योजना बना रही है और पीटरहॉफ की बुकिंग बंद करने के पीछे क्या कारण हैं।
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