बेटी होने पर मंडी के जिस नसलोह गांव में गुस्साए बाप ने एक दिन की नवजात बेटी को मार डाला था, उसी गांव की बेटियों ने रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के दौर में ऐसी घटना से आहत महिलाओं और ग्रामीणों ने गांव में एकजुट होकर श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखा। यह संदेश देने का प्रयास किया कि अगर बेटियां ही नहीं रहेंगी तो फिर भविष्य में किससे राखी बंधवाओगे।
रक्षा, दीपिका और लतेश ने कहा कि आधुनिक परिवेश में जहां केंद्र और राज्य सरकारें बेटियों को बचाने का प्रयास कर रही हैं, वहीं ऐसी घटनाएं मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। स्वास्थ्य विभाग कटौला के स्वास्थ्य शिक्षक राकेश यादव और स्थानीय पंचायत के वार्ड सदस्य राकेश कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि नवजात बेटी की हत्या ने सबको झकझोर दिया है। लिहाजा, लोगों ने इस बार रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया।
इस जघन्य अपराध से गांव का नाम बदनाम हुआ है, लेकिन गांव के लोग यह संदेश देना चाहते हैं कि एक व्यक्ति के बुरे काम दोष सभी को नहीं दिया जा सकता। गांव के लोग बेटियों के प्रति पूरा आदर सम्मान रखते हैं। बता दें कि 29 और 30 जुलाई की रात को गांव की एक महिला ने घर पर बेटी को जन्म दिया। पति बेटे की चाह पाले हुए था। बेटा होने पर गुस्साए बाप ने एक दिन की नवजात का बेरहमी से कत्ल कर दिया। आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है।
हम बनेंगी अपराजिता, फैलाएंगी जागरूकता
इंदिरा कुमारी और शिल्पा ने कहा कि वह इस घटना की कड़ी निंदा करती हैं। इस कलंक को धोने के लिए हमें बेटियों को बचाने व पढ़ाने का संकल्प लेना होगा, अपराजिता बनकर जागरूकता की अलख जगानी होगी। इस दौरान सबने मिलकर बच्ची की आत्मा के लिए प्रार्थना की और श्रद्धांजलि देने के बाद रैली भी निकाली।