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Shimla: राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा पर नामांकन में संपत्ति छिपाने का आरोप, निर्वाचन आयोग को शिकायत

Mon, 09 Mar 2026 06:56 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले में विधानसभा सचिव की ओर से आनन-फानन में प्रमाणपत्र जारी किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 
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राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा के खिलाफ निर्वाचन आयोग को शिकायत। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा के खिलाफ नामांकन प्रक्रिया के दौरान संपत्ति के विवरण छिपाने और चुनावी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई गई है। यह शिकायत धर्मशाला की अधिवक्ता निताशा कटोच की ओर से दायर की गई है। शिकायत में कहा गया है कि अनुराग शर्मा, निवासी गांव बीड़, तहसील बैजनाथ, कांगड़ा को 7 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया। लेकिन उनके नामांकन के साथ दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्तियों का पूरा और सही विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया, जो कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 33 के तहत अनिवार्य है।

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भूमि संपत्तियों का विवरण हलफनामे में नहीं दिया गया। लाइसेंसी हथियार से संबंधित विवरण भी नामांकन के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में सही प्रकार से प्रदर्शित नहीं किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले में विधानसभा सचिव की ओर से आनन-फानन में प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास सरकारी अनुबंध लंबित हैं तो उसके संबंध में स्पष्ट स्थिति होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए था। उन्होंने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

शपथ पत्र मेें कोई गलती नहीं की : अनुराग शर्मा
राज्यसभा के लिए सांसद चुने जाने के बाद अनुराग शर्मा ने कहा कि शपथ पत्र और संपत्ति के बारे में हुई किसी शिकायत की उन्हें जानकारी नहीं है। उनका शपथ पत्र हर तरह से ठीक है और किसी भी कागज में उन्होंने कोई गलती नहीं है। शर्मा ने कहा कि वह खुद कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। छात्र जीवन से लेकर उन्होंने लगातार मेहनत की है। उन्होंने कहा कि उनके पिता वर्ष 1979 से ए श्रेणी के ठेकेदार थे। अब उनके पिता और माता दोनों का ही देहांत हो चुका है। वह पैतृक कारोबार को संभाल रहे हैं। ठेकेदार रहते उन्होंने तमाम काम जो भी किए हैं, उनका भुगतान चेक के माध्यम से होता है। हर काम नियमों के तहत होता है। वह जीएसटी और आयकर सब देते हैं। उन्होंने कहा कि संपत्ति की घोषणा में उन्होंने अपनी बैलेंस शीट भी लगा रखी है। किसी को अगर आपत्ति है तो वह जहां मर्जी शिकायत कर ले, उन्हें इससे कोई डर नहीं है। वह भोलेनाथ के भक्त हैं।

कांग्रेस के साधारण राज्यसभा सांसद के पास करोड़ों के सरकारी ठेके : जयराम
 पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्यसभा के लिए जिस व्यक्ति को कांग्रेस ने साधारण कार्यकर्ता बताकर टिकट दिया, उसके शपथपत्र में लगभग 230 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सामने आई है। वर्तमान सरकार में उनके पास कई करोड़ रुपये के ठेके भी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ही कई नेता यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि यही साधारण कार्यकर्ता की परिभाषा है तो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं को भी ऐसा अवसर क्यों नहीं मिला। ठाकुर ने कहा कि भाजपा ने एक सैद्धांतिक निर्णय लेते हुए राज्यसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। इससे कांग्रेस को स्वाभाविक रूप से बड़ा अवसर मिला।

बावजूद कांग्रेस के भीतर जिस प्रकार का संघर्ष और भ्रम की स्थिति देखने को मिली, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली जाकर अपना पक्ष रख रहे थे और कई नेताओं को मुख्यमंत्री की ओर से भरोसा दिलाया जाता रहा कि उनके नाम पर विचार किया जा रहा है। अंततः यह स्पष्ट हुआ कि मुख्यमंत्री ने अपने ही सहयोगियों और मित्रों को गुमराह किया। कुछ नेताओं ने तो राज्यसभा नामांकन से जुड़ी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली थीं। अंतिम समय में स्थिति बदल गई और इससे कांग्रेस के भीतर भारी असंतोष पैदा हुआ। वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की ओर से सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त करना इस बात का प्रमाण है। आज सरकार मंत्रिमंडल से नहीं बल्कि मित्र मंडल से चलाई जा रही है। फैसले मंत्रिमंडल की बैठकों में नहीं बल्कि एक सीमित मित्र मंडल के बीच लिए जा रहे हैं, जहां यह तय होता है कि किसे लाभ देना है और किसे किनारे करना है।
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प्रमाण पत्र जारी करने के फैसले की हो उच्च स्तरीय जांच : राणा
भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने राज्यसभा चुनाव को लेकर उठे विवाद पर मुख्य चुनाव आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज्यसभा प्रत्याशी अनुराग शर्मा को जारी किए गए जीत के प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। राणा ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत भेजी गई है, इसमें कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा की उम्मीदवारी को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9ए के तहत अयोग्य ठहराने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि उम्मीदवार के हलफनामे में स्वयं यह उल्लेख है कि उनका मुख्य व्यवसाय सरकारी ठेकेदारी है और उनके कई सरकारी ठेके जारी हैं, जो इस धारा के तहत अयोग्यता का आधार बन सकते हैं। राणा ने कहा कि यही तथ्य पहले निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) के सामने भी रखे गए थे और उनसे अनुरोध किया गया था कि कानून के प्रावधानों के अनुसार हलफनामे और दस्तावेजों की जांच कर उचित निर्णय लिया जाए।
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