मंडी जिले के धर्मपुर में पीठ पर लदकर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने का चौतरफा विरोध झेल रहे राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा अब अपनी बात से पलट गए हैं। उन्होंने कहा था कि वे जूते उतारकर नाले को पार करना चाहते थे, लेकिन लोगों ने उन्हें जबरदस्ती पीठ पर उठा लिया।
अब वे कह रहे हैं कि उनके दाहिने पांव के अंगूठे में जख्म है। डॉक्टर ने पांव को पानी से बचाने की सलाह दी थी। अगर किसी कार्यकर्ता ने पीठ पर उठा ही लिया तो क्या गुनाह कर दिया। मामले को हवा देने वालों को धर्मपुर जाकर पूछना चाहिए कि राणा ने 9 अगस्त को कितने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। अगर पानी की वजह से वापस आ जाता तो भी विरोधी शोर मचाते। राणा ने केंद्र से प्राकृतिक आपदा पर राहत राशि न मिलने पर भी खरी-खोटी सुनाई है।
हमीरपुर में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि बीते साल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा से 832.67 करोड़ का नुकसान हुआ। फसलों को 353 करोड़ की क्षति पहुंची। इसकी रिपोर्ट केंद्र को भेजी गई। केंद्र से आई टीम ने प्रदेश में 170 करोड़ के नुकसान का आंकलन रिपोर्ट में दिखाया।
बावजूद इसके महज 63 करोड़ की राहत राशि मिली। फसलों को हुए नुकसान के बदले आज तक एक रुपया नहीं मिला। जम्मू और आंध्रा में भी त्रासदी आई थी। केंद्र ने दोनों राज्यों को एक-एक हजार करोड़ की आर्थिक मदद दी, लेकिन प्रदेश को नाममात्र की आर्थिक सहायता दी गई। इस बार भी धर्मपुर में करीब 450 करोड़ के नुकसान का आकलन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 17 अगस्त को शिमला में राज्य आपदा प्रबंधन बोर्ड की बैठक बुलाई गई है।