केंद्रीय रेल बजट में इस बार रेलमंत्री प्रभु की ‘कृपा’ से भी पहाड़ अछूता
ही रहा। हिमाचल को न तो कोई नई रेललाइन मिली है और न ही कोई नई रेल।
हालांकि, प्रदेश के सभी भाजपा सांसदों की पूरी ताकत झोंकने के बाद महज
प्रस्तावित और निर्माणाधीन तीन पुरानी परियोजनाओं के लिए 355 करोड़ रुपये
का बजट का प्रावधान किया गया है। इसके तहत भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन के लिए 160 करोड़ मिलेंगे। नंगल-तलवाड़ा रेललाइन के लिए 100 करोड़ का बजट दिया गया है। चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन के लिए केंद्रीय बजट में 95 करोड़ जारी होंगे।
ऊना-हमीरपुर रेललाइन का सर्वे एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। ऊना-अंब के बीच 25 किमी लंबी रेल लाइन के विद्युतीकरण को मंजूरी दी गई हैं। सामरिक महत्व के मनाली-लेह प्रोजेक्ट को इस बार भी हरी झंडी नहीं मिल पाई है। राज्य सरकार और सभी सांसदों के अनुरोध के बावजूद इसे बजट में शामिल नहीं किया गया, जिससे प्रदेश के लोगों को फिर निराशा हाथ लगी है।
अब तक 25 से 30 करोड़ रुपये ही मिलते आए
सूत्रों का कहना है कि रेल बजट में पहली बार प्रदेश की तीन रेल लाइनों के लिए 355 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे पहले सालाना 25 से 30 करोड़ रुपये ही मिलते आए हैं। खास बात यह है कि हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर अपने संसदीय क्षेत्र की चार परियोजनाओं को बजट में डलवाने में सफल रहे। इसके बावजूद पहाड़ पर सुरेश प्रभु की रेल नहीं चढ़ पाई।
सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि पहली बार रेल बजट में हिमाचल की पांच पुरानी योजनाओं के लिए भारी भरकम बजट मिला है। तीन रेल लाइनों के लिए 355 करोड़ दिए गए हैं। यूपीए सरकारों में कभी ऐसा नहीं हुआ। इससे प्रदेश में निश्चित तौर पर रेलवे का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
सांसद राम स्वरूप शर्मा ने कहा कि बजट में प्रस्तावित मनाली लेह रेल लाइन को शामिल नहीं किया गया है। इससे निराश होने की जरूरत नहीं हैं। इस लाइन के लिए प्रयास जारी रहेंगे। ऐसा भी हो सकता है कि बीच में भी इस लाइन के लिए केंद्र सरकार घोषणा कर सकती है।
सांसद वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि केंद्रीय रेल बजट पूरे देश के लिए है। इसमें किसी भी राज्य विशेष पर फोकस नहीं किया गया है। निश्चित तौर पर इससे रेलवे को मजबूत करने में करने में मदद मिलेगी। क्योंकि, पहली बार बड़े पैमाने पर सुरक्षा और सुविधाओं की बात की गई है।
उम्मीदों के अनुरूप नहीं रेल बजट: वीरभद्र
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय रेल बजट को खोखले विचारों और वायदों से भरा औसत बजट करार दिया है। कहा कि बजट विशेषकर प्रदेश के लोगों को निराश करने वाला है। लोकसभा में प्रस्तुत किए गए रेल बजट पर प्रतिक्रिया में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के बार-बार आग्रह के बावजूद राज्य में रेल मार्गों विशेषकर भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी से लेह तक जो सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, के विस्तार को तवज्जो न देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
भारत सरकार ने एक बार फिर प्रदेश सरकार के रेल मार्गों के विस्तार और मौजूदा मार्गों को ब्रॉडगेज में परिवर्तित करने के प्रस्तावों को नजरअंदाज किया है। नई रेल चलाने के संदर्भ में एक भी घोषणा नहीं की है। देश के आमजन रेल किराए में कमी की अपेक्षा कर रहे थे।
बोले, धराशायी हो गए भाजपा सांसदों के दावे
जहां तक रेलवे के आधुनिकीकरण का सवाल है, इस कार्य के लिए संसाधन कैसे सृजित किए जाएंगे, इस दिशा में कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। कहा कि यूपीए सरकार की ओर से प्रस्तुत अंतिम रेल बजट में कुछ नई रेल लाइनों और विस्तार के सर्वेक्षण की घोषणाएं की गई थीं, लेकिन इस बजट में इनका भी कोई उल्लेख नहीं है।
उन्होंने कहा कि केंद्र में एनडीए सरकार बनने के उपरांत प्रदेश के भाजपा नेता राज्य में रेल अधोसंरचना में सुधार की शेखी बघार रहे थे, लेकिन उनके सारे दावे धराशायी हो गए। उन्होंने कहा कि राज्य भाजपा केंद्र सरकार से इस मामले को उठाने और मौजूदा रेल बजट में हिमाचल को तवज्जो मिलने की डींगें हांक रहे थे। अब उनके झूठे दावे सामने आए हैं।