आईआईटी मंडी प्रबंधन की ओर से पूर्व निदेशक टीमोथी ए. गोंजाल्विस को दी गई प्रोफेसर एमेरिटस ऑनरेरी की उपाधि पर सवाल उठने लगे हैं। संस्थान के ही पूर्व कर्मचारी सुजीत स्वामी ने आरटीआई के माध्यम जानकारी जुटाकर दावा किया है कि पूर्व निदेशक इस उपाधि के लिए तय मापदंड पूरे नहीं करते। वह आईआईटी मद्रास के नियमित कर्मचारी रहे। वर्ष 2010 से 2020 तक आईआईटी मंडी के निदेशक रहे हैं। यह कार्यकाल डेपुटेशन के तहत रहा है।
नियमानुसार यह उपाधि केवल आईआईटी मंडी के उस कर्मचारी को ही दी जा सकती है, जो आईआईटी मंडी से सेवानिवृत्त हुए और जिसने रेगुलर पोजिशन पर कम से कम 10 साल तक लगातार सर्विस प्रोफेसर के तहत सेवाएं दी हों। इस संदर्भ में पूर्व कर्मचारी ने मिनिस्ट्री ऑफ एजूकेशन और आईआईटी मंडी की बीओजी यानी बोर्ड ऑफ गवर्नर को लिखित में शिकायत दी है।
साथ ही इस उपाधि एवं सुविधाओं को वापस लेने की मांग उठाई है। आईआईटी प्रबंधन ने इस संदर्भ में सुजीत स्वामी की तरफ से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। स्पष्ट किया है कि प्रो. टीमोथी ए. गोंजाल्विस को नियमों के तहत की यह उपाधि दी गई है।