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घोषणाएं नहीं, योजनाओं को अमलीजामा पहनाए सरकार

Thu, 31 Jan 2019 12:46 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सत्ता में आने के बाद भाजपा की जयराम सरकार 9 फरवरी को दूसरा वार्षिक बजट पेश करेगी। इस नए बजट से प्रदेश के किसानों और बागवानों को कई उम्मीदें हैं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जो घोषणाएं पिछले बजट में की गई थीं, क्या वे पूरी हो पाई हैं? हालात यह हैं कि राज्य के लाखों किसान और बागवान जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं।

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अधिकांश ने फसलें उगानी छोड़ दी हैं और खेत बंजर पड़े हैं। सरकार ने पिछले बजट में किसानों की फसलें जंगली जानकारों से बचाने के लिए सोलर फेसिंग योजना को लागू करने की बात कही थी, लेकिन यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। प्रदेश के अधिकांश किसानों की फसलों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग के लिए वित्तीय मदद भी नहीं मिली।

शिमला में आयोजित नाबार्ड के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर स्पष्ट शब्दों में स्वीकार कर चुके हैं कि सरकार के पास इतनी धनराशि नहीं है कि सभी किसानों को सोलर फेंसिंग के लिए वित्तीय मदद दी जा सके। किसानों की तरह बागवान भी जंगली जानवरों से परेशान हैं। 
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बागवानों को नहीं मिला ए ग्रेड फलों का समर्थन मूल्य
प्रदेश के सेब उत्पादकों सहित अन्य बागवानों को सरकार सिर्फ बी और सी ग्रेड के फलों का समर्थन मूल्य देती रही है। यह समर्थन मूल्य भी सेब, आम आदि गिनती के फलों को मिलता है। बागवान लंबे समय से सरकार से ए ग्रेड के फलों का समर्थन मूल्य घोषित कर बागवानों को बिचौलियों के हाथ लूटने से बचाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन इन्हें राहत नहीं दी गई। 
 
1134 करोड़ का बागवानी प्रोजेक्ट का लाभ नहीं 
पिछले बजट में सरकार ने विश्व बैंक की मदद से चल रहे 1134 करोड़ के बागवानी विकास प्रोजेक्ट के तहत बागवानी क्षेत्र के विकास की बात कही थी। इस प्रोजेक्ट के तहत राज्य में बागवानी विकास के साथ फलों के विपणन और भंडारण की व्यवस्था की जानी थी। सरकार न तो मंडियों का ढांचा मजबूत कर पाई और न ही बागवानों की फसलों के लिए उपयुक्त संख्या में कोल्ड स्टोर तैयार कर सकी है। इससे बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बागवानों को औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचने को विवश होना पड़ रहा है। 

कई योजनाएं अधूरी 
किसानों-बागवानों को मिलने वाली सब्सिडी अभी तक नहीं मिली है। पाली हाउस के लिए सब्सिडी का मामला भी लटका है। कृषि फसल बीमा योजना के तहत गिनती की फसलें कवर की गई हैं। इसी तरह बागवानी फसल बीमा योजना का लाभ सेब के अलावा अन्य फल उत्पादकों को नहीं मिल रहा है। पावर टिलर और कृषि बागवानी में उपयोग होने वाले उपकरण का मामला भी लंबित है।

क्या कहते हैं बागवान संघ के अध्यक्ष
हिमाचल प्रदेश फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि पिछले बजट में सरकार ने वादा किया था कि पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। नए बजट में सीए स्टोर और एक बड़ी मंडी बनाने की जरूरत है। इस मंडी में सभी सुविधाएं होनी चाहिए। किसानों और बागवानों को जंगली जानवरों से निजात दिलाई जानी चाहिए।
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हिमाचल में फल उत्पादन हजार टन में 
फल                     2015-16    2016-17      2017-18
सेब                      777.13      468.13        427.61
अन्य समशीतोष्ण फल   70.26         51.50          25.36
नींबू प्रजाति फल         26.62         28.05          16.74
अन्य उपोष्णीय फल      51.45         60.21          29.29

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