गलत बिल जारी करने पर लगाई फटकार, अब गड़बड़ी न करें अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राजधानी में अगले महीने तक सतलुज नदी का पानी सप्लाई करने की तैयारी है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पेयजल कंपनी को 15 जुलाई तक सतलुज नदी का पानी शिमला पहुंचाने का टारगेट दिया है।
पहले जून में इस नदी का पानी शिमला पहुंचाने का दावा था जो काम में देरी से पूरा नहीं हो पाएगा। शुक्रवार को प्रदेश सचिवालय में हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए शहरी विकास मंत्री ने इस परियोजना के काम की रिपोर्ट ली। पूछा कि सतलुज पेयजल परियोजना का अभी कितना काम बचता है। कब इसका ट्रायल शुरू होगा। कंपनी ने रिपोर्ट दी कि पंपिंग स्टेशन, टैंक बनाने का काम लगभग पूरा कर लिया है। पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है। अब वाॅल्व लगाने का काम चल रहा है और मशीनरी स्थापित की जा रही है। जून के अंत तक इस परियोजना में टेस्टिंग शुरू करने की योजना है। मंत्री ने निर्देश दिए कि 15 जुलाई तक सतलुज का पानी शिमला पहुंचाया जाए ताकि बरसात में दूसरी परियोजनाओं में आने वाली गाद के कारण शहर में पानी का संकट न हो। कहा कि इस काम में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि इसी महीने विधायक, मेयर और अधिकारियों के साथ वह खुद शकरोड़ी से शिमला तक इस पूरी परियोजना के काम का निरीक्षण भी करेंगे।
विज्ञापन
गलत बिल पर लगाई फटकार शहर में कई उपभोक्ताओं को पानी के गलत बिल जारी करने पर भी मंत्री ने सुएज कंपनी को फटकार लगाई। कहा कि अब ऐसी गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। इससे शहर के लोग परेशान हो रहे हैं। लोगों को गलत बिल जारी नहीं होने चाहिए। शहरी विधायक हरीश जनारथा ने भी पानी के बिल चेक करके ही जारी करने के निर्देश दिए। शहर में पानी से जुड़ी शिकायतें सुनने के लिए कंपनी ग्राहक सेवा केंद्र भी बनाने जा रही है। संजौली में इसका निर्माण किया जा रहा है। बाकी वार्डाें में भी यह केंद्र बनेंगे। मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि निगम कंपनी को इनके लिए जगह देगा। इससे कंपनी को आसानी से जगह मिलेगी जबकि निगम को किराया आएगा। कहा कि छोटा शिमला चार्ली विला के पास भी सेंटर बनाने के लिए सीएम से मंजूरी ले ली है।
मशोबरा में 10 जून से शुरू होगा काम शहरवासियों को 24 घंटे पानी देने के लिए राजधानी में 10 जून से पाइप बिछाने का काम शुरू करने की तैयारी है। मशोबरा से यह काम शुरू किया जा रहा है। इसके लिए कंपनी ने पाइप भी मंगवा ली है। बैठक में महापौर सुरेंद्र चौहान ने सुझाव दिया कि हर जगह खुदाई करने से अच्छा है कि छोटे आकार वाले पाइप दीवारों के साथ साथ बिछाई जाए। इससे लागत कम आएगी और पाइपलाइन टूटने पर इसकी मरम्मत भी आसान होगी। महापौर ने ठोस कचरा प्रबंधन, पार्किंग निर्माण को लेकर भी मंत्री से बजट की मांग की।