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फीस बढ़ोतरी के खिलाफ सुलगी चिंगारी, प्रदर्शन

Fri, 01 Aug 2014 10:15 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
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विश्वविद्यालय और प्रदेश भर के कॉलेजों में फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही धरने-प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। चुनावी सीजन में लिए इस फैसले ने छात्र संगठनों को बैठे बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।
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हालांकि, विवि के कुलपति सहित तमाम अधिकारी इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं, मगर उनकी चुप्पी से साफ है कि फीस बढ़ेगी। कितनी बढ़ेगी, इस पर एचपीयू वेट एंड वाच की स्थिति बनाए हुए है। विवि प्रशासन छात्रों के विरोध की हद का अंदाजा लगाने के बाद ही दरों को लेकर स्थिति साफ करेगा।

एसएफआई और एबीवीपी ने शिमला सहित दर्जनों कॉलेजों और विवि में प्रदर्शन किया। इस पर आगामी रणनीति भी बनाई जा रही है। एनएसयूआई ने भी इस फैसले के विरोध में बैठकें कीं।
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एसएफआई का 55 कॉलेजों में प्रदर्शन

एसएफआई के राज्य सचिव मनीष शर्मा, सह सचिव पुनीत धांटा ने कहा कि फीस बढ़ोतरी के विरोध में वीरवार को सभी जिला मुख्यालयों के कॉलेजों और 43 अन्य कॉलेजों में धरने प्रदर्शन किए गए।

एचपीयू में रैली और प्रदर्शन किया गया। फीस बढ़ोतरी और सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ आने वाले समय में पूर्ण शिक्षा बंद किया जाएगा और आंदोलन को उग्र बनाया जाएगा।

उन्होंने ईसी को विवि और छात्र व शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के फैसले लेने के बजाया प्रदेश की सत्तासीन सरकारों के एजेंडे को लागू करने वाली संस्था बनने का आरोप लगाया

एबीवीपी का 50 से अधिक कॉलेजों में हल्ला

एबीवीपी के राज्य सह मंत्री नवनीत कौशल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कौल नेगी ने बताया कि फीस बढ़ोतरी और रूसा के खिलाफ वीरवार को 50 से अधिक कॉलेजों में धरने प्रदर्शन किए गए।

विश्वविद्यालय में कुल सचिव का घेराव किया गया। आने वाले समय में आंदोलन और उग्र कर आठ अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

राज्यपाल, शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक के समक्ष मामला उठाकर दोनों फैसलों को वापस लेने की मांग की जाएगी। शुक्रवार को कॉलेजों में मानव शृंखला बनाकर विरोध जताया जाएगा।
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एनएसयूआई ने भी किया प्रदर्शन

एनएसयूआई के राज्य अध्यक्ष रिंपल चौधरी और महासचिव अरविंद धीमान के मुताबिक वीरवार को एक दर्जन कॉलेजों की इकाइयों ने प्राचार्यों को फीस बढ़ोतरी का फैसला लेने को लेकर मांग पत्र सौंपा।

शुक्रवार को प्रदेश भर में धरने प्रदर्शन होंगे। वीरवार को विश्वविद्यालय इकाई ने फैसला वापस लेने की मांग को लेकर कुलपति से मुलाकात की और चेताया कि यदि फैसला न बदला तो आने वाले समय में प्रदेश भर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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