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आईआईएम खुलने से पहले ही शुरू हो गई खींचतान

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आम बजट में हिमाचल को मिले भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के खुलने से पहले ही खींचतान शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इसे सोलन या सिरमौर जिले में खोलने का विचार रखते हैं।
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अमर उजाला से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से अब तक हुई बातचीत में पता चला है कि आईआईएम के लिए करीब 50 एकड़ जमीन चाहिए। हम इतनी सरकारी जमीन की तलाश कर रहे हैं।

यदि सोलन-सिरमौर में नहीं मिली तो अन्य जिलों का विकल्प भी खुला है। इस संस्थान के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई देरी नहीं होगी।

पूर्व मंत्री बिलासपुर में चाहते हैं आईआईएम

बिलासपुर में 20 सूत्री कार्यक्रम के अध्यक्ष रामलाल ठाकुर ने आईआईएम को बिलासपुर में खोलने की मांग की है। कहा कि आईआईएम बिलासपुर में खुलना चाहिए, क्योंकि विस्थापन का दर्द झेलने वाले बिलासपुर को अब तक कोई बड़ा संस्थान नहीं मिला है।

भाखड़ा बांध बनने के बाद बिलासपुर के लोग उजडे़, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक उन्हें इसका फल नहीं मिला। राज्य को जब भी बड़ा प्रोजेक्ट मिलता है तो सबसे पहले कांगड़ा, मंडी का नाम आता है।

इसके बाद राजधानी होने के कारण शिमला की बारी आती है, लेकिन बिलासपुर का जिक्र तक नहीं होता। सोलन में तो एक ही पंचायत में दो विवि हैं। बिलासपुर में आईआईएम के लिए जगह की कमी नहीं है।
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प्रदेश में अभी आईआईटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी

प्रदेश में इससे पहले केंद्रीय विश्वविद्यालय कांगड़ा जिला में है। यूपीए सरकार की ओर से दी गई आईआईटी मंडी में है। नेशनल फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान भी कांगड़ा में है। अब आईआईएम सोलन या सिरमौर में खोला सकता है।

हालांकि, तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली ने कहा था कि आईआईएम कहां खुलेगा, इस पर कैबिनेट में चर्चा होनी चाहिए।
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