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प्रापर्टी टैक्स और पानी के बिल रुके, इकट्ठा पड़ेगा बोझ

Tue, 02 Dec 2014 01:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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यूनिट एरिया मेथड से प्रापर्टी टैक्स वसूली इस साल होने पर संशय बरकरार है। मेथड के तहत शहर का फील्ड सर्वे करने वाली परुडा कंपनी ने प्रापर्टी टैक्स के बिल जारी करने से इंकार कर दिया है। दो बार नोटिस भेजने के बाद भी कंपनी बिल जारी करने को तैयार नहीं है।
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कंपनी ने नगर निगम से बकाया 15 लाख रुपये की राशि को जारी करने की मांग की है। नगर निगम और परुडा कंपनी के बीच एमओयू साइन हुआ है। इसके तहत कंपनी को शहर का सर्वे करने, बिल जारी करने का साफ्टवेयर तैयार करने और एक साल तक काम देखने की जिम्मेवारी सौंपी है।

कंपनी के साथ 49 लाख 71 हजार रुपये में नगर निगम ने करार किया था। एमसी का दावा है कि 60 प्रतिशत राशि का भुगतान नगर निगम ने कंपनी को कर दिया है। शेष 40 फीसदी राशि यानी 15 लाख रुपये काम शुरू करने पर देने हैं लेकिन कंपनी ने पहले भुगतान करने की शर्त रखकर मामले को उलझा दिया है।
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एमसी के कार्यकारी सहायक आयुक्त विजय गुप्ता ने कहा कि इस मामले को लेकर कंपनी से साथ बैठक हो चुकी है। जल्द मामला सुलझ जाएगा।

दो माह से पानी के बिल पर एमसी नहीं ले पा रहा फैसला
पानी के बिल मामले पर दो माह से कोई फैसला नहीं हो पा रहा। घरेलू पानी के बिल का मामला राज्य सरकार और कामर्शियल बिल का मामला नगर निगम में विचाराधीन है। 26 सितंबर से राजधानी शिमला में पानी के कोई बिल जारी नहीं हुए हैं। बिल के बारे में जानकारी लेने नगर निगम पहुंच रहे लोगों को संतोषजनक जवाब भी नहीं दिए जा रहे। लोगों को आज-कल, आज-कल में फैसला होने की बात कही जा रही है।

हाईकोर्ट ने पानी की दरों को दोबारा निर्धारित करने की अधिसूचना को 26 सितंबर को रद कर किया था। कोर्ट ने कहा है कि दरें निर्धारित करने की शक्ति केवल राज्य सरकार की है। हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद से नगर निगम ने शहर में पानी के बिल जारी करने का काम बंद कर दिया है।

11 नवंबर को नगर निगम प्रशासन ने राज्य सरकार को रिमाइंडर भेजकर पानी के फ्लैट रेट की अधिसूचना को जारी करने की मांग की है। वहीं सरकार से आदेश मिलते ही घरेलू बिल जारी कर दिए जाएंगे। कामर्शियल बिल मामले पर विधि शाखा की राय मांगी है।

सरकार के पास छूट का मामला लंबित
कृषि भूमि, घासनी, आम रास्ते और गैर मुमकिन भूमि को प्रापर्टी टैक्स से छूट देने का मामला राज्य सरकार के पास भेजा गया है। सरकार से आदेश नहीं आने के चलते मामला अभी तक लंबित पड़ा हुआ है। इसके अलावा एकल महिला, विधवा, विकलांग, 70 साल की आयु से अधिक बुजुर्गों, एससी/एसटी बीपीएल को प्रापर्टी टैक्स में 50 फीसदी छूट देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है।

शुरू से विवादित है यूनिट एरिया मेथड
नई टैक्स प्रणाली यूनिट एरिया मेथड अधिसूचित होने के बाद से विवादित रही है। फरवरी 2012 में राज्य सरकार ने यूनिट एरिया मेथड से टैक्स वसूली के आदेश दिए थे। एमसी ने सरकार के आदेश को मानने से इंकार कर दिया। डेढ़ साल तक इस मामले पर सरकार और नगर निगम के बीच टकराव रहा। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप होने के बाद अब एमसी यूनिट एरिया मेथड लागू करने को राजी है।

दरकिनार करना मुश्किल
परुडा कंपनी को दरकिनार कर नगर निगम अपने स्तर पर बिल जारी नहीं कर सकता है। प्रापर्टी टैक्स के दायरे में आए करीब 48 हजार भवन मालिकों का सारा रिकार्ड कंपनी के पास है। ऐसे में कंपनी ही बिल जारी करने में सक्षम है। वहीं नगर निगम का तर्क है कि बिल जारी होने का काम शुरू होने पर 30 प्रतिशत राशि जारी की जाएगी।

कमर्शियल बिल मामले पर मांगी कानूनी राय
नगर निगम ने पानी के कमर्शियल बिल जारी करने के मामले में विधि शाखा से राय मांगी है। हाईकोर्ट ने सिर्फ घरेलू पानी के रेट को दोबारा तय करने की अधिसूचना को रद किया है। नगर निगम ने कामर्शियल बिल जारी करने और जमा करने शुरू कर दिए हैं।

शहर के चार हजार से अधिक कामर्शियल कनेक्शन धारकों से मीटर रीडिंग के आधार पर बिल की वसूली होती है। इन उपभोक्ताओं को निगम की बेपरवाही के चलते परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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