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अच्छी खबर: शिक्षकों और विद्या उपासकों पर बरसा पैसा

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प्रदेश सरकार प्राथमिक शिक्षकों को पदोन्नति का तोहफा देने जा रही है। यह पदोन्नति प्लेसमेंट (टेंपरेरी) आधार पर होगी। इनकी पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर होगी। शिक्षा विभाग ने 15 दिन के भीतर प्रमोशन करने को कहा है। सरकार के इस फैसले से प्राइमरी स्कूलों के करीब 1500 से अधिक शिक्षकों को फायदा होगा।
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प्राथमिक शिक्षा निदेशक आरके प्रूथी ने इस बारे में जिला उपनिदेशकों को पत्र भेजा है। प्रदेश में जेबीटी, एचटी, सीएचटी और बीईईओ की पदोन्नतियां बीते दो साल से रुकी हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण सरकार फिलहाल इन शिक्षकों को प्लेसमेंट आधार पर पदोन्नति दे रही है।

कोर्ट से मामला क्लीयर होने के बाद इन्हें नियमित तौर पर पदोन्नति मिलेगी। शिक्षकों को पदोन्नति के आदेश जारी करने पर प्राथमिक शिक्षक संघ ने अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा और निदेशक आरके प्रूथी का आभार जताया है।
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इसलिए कोर्ट गए थे शिक्षक

संघ के अध्यक्ष लाल चंद मेहता, महासचिव संजय अत्री, उपाध्यक्ष मोहन दत्त, कोषाध्यक्ष पवन शर्मा, महालेखाकार सुरजीत कुमार सहित जिला अध्यक्षों और महासचिवों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। प्रदेश महासचिव संजय अत्री ने कहा कि पदोन्नति बहाल होने से शैक्षिक और प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी। कहा कि इस समय बीईईओ, केंद्र मुख्य शिक्षक और मुख्य शिक्षकों के लगभग 700 पद खाली हैं। पदोन्नति किए जाने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

कोर्ट गई थे शिक्षक
प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव संजय अत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग ने 1996 में एडहाक पर तैनात शिक्षकों को 1996 में नियमित किया गया। इसके बाद 1992 में लगे वालंटियर शिक्षकों को 1998 में नियमित किया। इसके चलते एडहॉक के शिक्षक कोर्ट में चले गए थे। प्रमोशन में लंबा अंतराल पाए जाने पर कोर्ट ने शिक्षा विभाग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

विद्या उपासकों को दो पेंशन और सेवा लाभ

वहीं, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए में विद्या उपासक योजना के तहत लगे अध्यापकों को पेंशन और सेवा लाभ देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर वाली खंडपीठ ने जोगा सिंह और अन्य की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि विद्या उपासक अध्यापकों की नियमितीकरण तक की सेवा अवधि को पेंशन, सालाना वृद्धि और अन्य सेवा लाभों के लिए गिना जाए।

राज्य में वर्ष 2000 में लगभग 1400 विद्या उपासकों की तैनाती की गई थी। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थियों को योजना के तहत वर्ष 2000 में विद्या उपासक नियुक्त किया था और उनकी सेवाओं को वर्ष 2007 में नियमित किया गया था। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई है कि चूंकि 15 मई 2003 को और इसके बाद नियुक्त किए गए कर्मचारियों को पेंशन का लाभ नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें कंट्रीब्यूटरी पेंशन योजना 2006 के तहत लाभ दिया जाएगा।
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अदालत ने सुनाया ये फैसला

प्रार्थियों की सेवाओं को वर्ष 2007 में नियमित किया गया था, इसलिए वे पेंशन के हकदार नहीं हैं। अदालत ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्रार्थियों की नियुक्ति वर्ष 2000 में ही निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी, इसलिए इनकी नियुक्ति वर्ष 2000 से ही मानी जाएगी।

अदालत ने पेंशन नियम 1972 को स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी की नियुक्ति उसी दिन से गिनी जाएगी, जिस दिन से उसने पद संभाला हो। चाहे वह अस्थाई तौर पर ही क्यों न हो, यदि बीच के सेवा काल में कोई रुकावट न हो। खंडपीठ ने कहा कि प्रार्थी जोकि वर्ष 2000 में चयन प्रक्रिया के तहत विद्या उपासक नियुक्त किए गए थे और बिना किसी रुकावट के वर्ष 2007 में नियमित किए गए थे, इसलिए इनकी नियुक्ति वर्ष 2000 से ही मानी जाएगी।
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