प्रारंभिक शिक्षा विभाग में जेबीटी के पदों पर अपात्र लोगों की नियुक्तियों के मामले की विभागीय जांच शुरू हो गई है। अब उन अधिकारियों पर कार्रवाई होना निश्चित है, जो जेबीटी शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया की स्क्रीनिंग कमेटी में शामिल रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि जब विभाग ने जेबीटी पदों के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाए हैं तो आंखों पर पट्टी बांधकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कैसे अपात्र लोगों की जेबीटी शिक्षक के पदों पर नियुक्तियां दे दीं।
खास बात यह है कि तीन साल पूर्व जिन अधिकारियों के समय में ये भर्तियां हुई हैं, उनमें कुछ सेवानिवृत्त हो गए हैं। विभागीय जांच के दौरान विभाग में सेवाएं दे रहे और सेवानिवृत्त हो चुके सभी अधिकारियों से पूछताछ होनी है। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय हमीरपुर से मामले से जुड़ी रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय शिमला भेज दी गई है।
खास बात यह है कि जिन तीन अपात्र लोगों को जेबीटी के पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं, उन्होंने तीन साल का अनुबंध सेवाकाल पूरा कर लिया है। अब उनकी नियमितीकरण की प्रक्रिया भी लटक गई है। विभागीय जांच के बाद अब तीनों शिक्षकों को बर्खास्त करने के साथ तीन साल तक सरकारी खजाने से जारी किए वेतन की रिकवरी भी होगी।
ऐसे पकड़ में आया मामला
प्रारंभिक शिक्षा विभाग हमीरपुर ने वर्ष 2018 को बैचवाइज आधार पर जिले में अनुबंध पर तीन जेबीटी शिक्षकों की बैचवाइज भर्तियां की थीं। विभाग ने जेबीटी, डीईएलएड या ईटीटी समकक्ष व्यावसायिक योग्यता और 12वीं कक्षा में 50 फीसदी अंक, जबकि आरक्षित वर्ग के लिए 45 फीसदी अंकों की शर्त रखी थी।
विभाग ने जिन तीन सामान्य श्रेणी के शिक्षकों को नियुक्तियां दी हैं, उनमें एक ने नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) का कोर्स किया है, यह जेबीटी के समकक्ष नहीं है। दो अन्य शिक्षकों के 12वीं कक्षा में 40 और 42 फीसदी अंक हैं। तीन साल का अनुबंध पूरा होने के बाद अब जब विभाग ने शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की तो दस्तावेजों की जांच-पड़ताल में इस कोताही का भंडाफोड़ हो गया।
हमीरपुर में जेबीटी अनुबंध के आधार पर बैचवाइज भर्तियों तीन साल पूर्व हुई हैं। तीन लोगों की गलत नियुक्तियां हुई हैं। इस मामले में शिक्षा निदेशालय से क्लैरिफिकेशन मांगी गई है। निदेशालय से जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे, उनके अनुसार कार्रवाई होगी।
- संजय कुमार ठाकुर, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग हमीरपुर