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प्रियंका की जान बचाने को आरटीआई एक्टिविस्ट ने लिखा पत्र

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प्रियंका गांधी वाड्रा की शिमला में खरीदी जमीन की सूचना मांगने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट ने अब कैबिनेट सचिव और डीजीपी को पत्र लिखकर उनसे यह अनुरोध किया है कि इस संबंध में एक और आवेदक को पहले दी गई सूचना को तत्काल सीज किया जाए। उन्होंने कहा कि जैसा कि सरकार के अधिकारियों और एसपीजी ने कहा कि इससे प्रियंका की जान को खतरा हो सकता है तो ऐसी स्थिति में इस पर तत्काल रोक लगा दी जाए।
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आरटीआई एक्टिविस्ट देवाशीष भट्टाचार्य ने पत्र में कहा है कि जब उन्होंने यह सूचना मांगी तो उस समय एडीएम लॉ एंड ऑर्डर शिमला ने एक आदेश जारी किया था। 28 नवंबर 2014 के इस आदेश में जिक्र है कि इस तरह की सूचना 2012 में किसी और आवेदक को दी जा चुकी है। उसके बाद पता चला कि यह व्यक्ति साधुपुल में रहते हैं। कैबिनेट सचिव जिनके पास एसपीजी आती है, उनको लिखा कि जब उन्होंने सूचना मांगी तब तो सबने बोला कि प्रियंका गांधी की जान को खतरा है।
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कहा, विदेश में उस सूचना की कोई प्रतिलिपि तो नहीं

अगर प्रियंका गांधी की जान को बचाना है तो इस सूचना को जब्त किया जाए। उन्होंने डीजीपी हिमाचल से भी अनुरोध किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि देश या विदेश में उस सूचना की कोई प्रतिलिपि तो नहीं है, क्योंकि जब उनकी मांगी हुई सूचना से जान का खतरा हो सकता है तो इससे उनकी जान को खतरा है। देवाशीष भट्टाचार्य ने लिखा है कि उन्हें भी इसका डर है। हालांकि, ऐसा लगता नहीं है।

ऐसे में सूचना प्राप्त करने वाले उस व्यक्ति से एफीडेविट लिया जाए। इसकी प्रति उपायुक्त शिमला को भी भेजी कि 2012 का ऑर्डर रिकॉल करें। यह भी सुनिश्चित करें कि जिन अधिकारियों ने उस समय सूचना दी थी, तो उन्होंने उस समय प्रियंका गांधी से पूछा था कि नहीं। यह मालूम रहे कि सूचना आयोग में यही अपीलकर्ता देवाशीष प्रियंका की जान का खतरा होने वाली दलील को गलत ठहरा रहे थे।
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