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निजी स्कूलों की मनमानी शुरू, सत्र शुरू होते ही बढ़ा दी 15 फीसदी तक फीस

Fri, 16 Mar 2018 10:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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private schools
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हिमाचल में नया शैक्षणिक सत्र होते ही निजी स्कूलों की मनमानी शुरू हो गई है। राजधानी शिमला समेत प्रदेश भर में ज्यादातर स्कूलों ने एडमिशन से लेकर ट्यूशन फीस में पंद्रह फीसदी तक बढ़ोतरी कर दी है। फीस के अलावा बिल्डिंग फंड, स्कूल टैक्सी फेयर भी बढ़ा दिया गया है। वर्दी, किताबों-कॉपियों के नाम पर भी अभिभावकों से कई जगह वसूली शुरू हो गई है।

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हालांकि मार्च-अप्रैल माह में फीस वसूली का सिलसिला चलता रहेगा। सरकार के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी रोकने की अभी तक कोई भी व्यवस्था नहीं है। निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए नियामक आयोग के गठन की घोषणा की थी, लेकिन यह इस वर्ष घोषणा तक ही सीमित रह गया और हर साल की तरह इस बार भी अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की मनमानी का शिकार हो गए हैं।

शिमला शहर के अधिकांश इंग्लिश मीडियम स्कूलों ने अभिभावकों को नई प्रिंट कराई फीस बुक थमा दी है। कुछ जगह फीस बढ़ोतरी का नोटिस थमाया गया है। फीस बढ़ोतरी पर सरकार के हस्तक्षेप न होने से अभिभावकों को स्कूल के काउंटर या फिर बैंक के जरिये सीधे फीस जमा करानी पड़ रही है। इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई करवाने वाले ये निजी स्कूल दस फीसदी फीस बढ़ोतरी सालाना करने की बात मान रहे हैं, मगर फीस बढ़ोतरी के साथ विद्यार्थियों का हित कैसे जुड़ा है, इसे कोई स्पष्ट नहीं कर रहा। 

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स्कूल ड्रेस और किताबों की खरीद में भी मनमानी

हालांकि कुछ स्कूलों की वृद्धि पांच फीसदी तक है लेकिन अधिकांश 10 फीसदी और कुछ 15 फीसदी तक वृद्धि कर बैठे हैं। अभिभावकों से बातचीत पर पता चला कि शहर के अधिकांश स्कूलों ने एडमिशन और ट्यूशन फीस में पांच से सात हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नतीजतन प्रति विद्यार्थी फीस का खर्च ही 45 हजार से 60 हजार रुपये सालाना तक पहुंच गया है।

स्कूलों की इस मनमानी को रोकने के लिए सरकार न किसी से हिसाब मांगती है और न ही कोई और पहल हुई है। नर्सरी के दाखिलों में कई जगह बिल्डिंग फंड के नाम पर मनमानी राशि वसूली गई है। अमर उजाला ने प्रदेश भर के निजी स्कूलों में फीस स्ट्रक्चर को जाना तो पता चला कि सोलन जिले में 20 फीसदी, चंबा में 10, कुल्लू में 20, मंडी में 10 सिरमौर में 10 और ऊना जिले में 10 फीसदी फीस बढ़ाई जा रही है। 

अधिकांश निजी स्कूल मनमाने तरीके से सिर्फ फीस ही नहीं बढ़ा रहे, स्कूल ड्रेस और किताबों की खरीद में भी जमकर वसूली की जा रही है। चुनिंदा दुकानों से अभिभावकों को ड्रेस और किताबें लेने के एसएमएस किए जा रहे हैं।

निर्धारित दुकानों से खरीद नहीं करने वाले अभिभावकों को स्कूल डायरी में बाकायदा नोट लिखकर भेजे जा रहे हैं। स्कूलों द्वारा तय चुनिंदा दुकानों में बाजार की अन्य दुकानों के मुकाबले अधिक कीमत पर ड्रेस और किताबें बेची जा रही हैं, जिसमें स्कूलों की कमीशन होती है।

निजी स्कूलों को नियामक आयोग के दायरे में लाने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अब इस संदर्भ में सरकार को फैसला लेना है। विधानसभा से प्रस्ताव पारित होते ही एक्ट लागू कर दिया जाएगा। - अरुण कुमार शर्मा, सचिव शिक्षा विभाग, हिमाचल सरकार

आठ से दस फीसदी तक की जाती है बढ़ोतरी

डीएवी न्यू शिमला की प्रधानाचार्य अनुराधा का कहना है कि  हर साल औसतन दस फीसदी फीस बढ़े खर्च पूरे करने को बढ़ाई जाती है। इसमें बिल्डिंग फंड आदि नहीं लिया जाता। फीस न्यायालय के आदेशों को ध्यान में रखकर ही ली जाती है। फीस स्कूल में दी जा रही सुविधाओं के मुताबिक ही तय होती है। 

फीस में दस या इससे अधिक भी की जाती है बढ़ोतरी
ऑक्लैंड हाउस स्कूल की निदेशिका सुनीता जॉन ने माना कि हर साल फीस में स्कूल के बढ़े खर्च पूरे करने को दस फीसदी या इससे अधिक की बढ़ोतरी करनी पड़ती है।

बढ़ाई फीस को स्टाफ के वेतन बढ़ोतरी जैसे रूटीन खर्च पर व्यय किया जाता है। स्कूल अपना खर्च बिना किसी मदद से स्वयं ही पूरा करता है, तो फीस बढ़ाना जरूरी हो जाता है। 
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निजी स्कूलों की मनमानी रोकने का दावा खोखला

भाजपा के चुनावी दृष्टि पत्र में की गई घोषणा और सत्ता में आते ही निजी स्कूलों पर लगाम कसने को लेकर जयराम सरकार के सभी दावे खोखले साबित हो गए हैं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों ने फीस में भारी-भरकम बढ़ोतरी कर वसूली शुरू कर दी है।

बिल्डिंग फंड, ट्यूशन फीस सहित कई अन्य खर्चों के नाम पर निजी स्कूलों ने फीस दो से पांच हजार रुपये तक बढ़ाकर वसूलना भी शुरू कर दिया। निजी स्कूलों को नियामक आयोग के दायरे में लाने को लेकर सरकार द्वारा की घोषणाएं फाइलों में गुम होकर रह गई हैं।

अपनी लेटलतीफी के चलते इस साल जयराम सरकार अभिभावकों को निजी स्कूलों के हाथों से लुटने से नहीं बचा पाई। निजी स्कूलों का फीस स्ट्रक्चर तय करने के लिए सरकार के पास र्कोई नीति नहीं है। निजी स्कूल हर साल मनमाफिक तरीके से फीस में बढ़ोतरी करते हैं। हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद किसी भी सरकार ने निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने का दम नहीं दिखाया है।

शिक्षा विभाग के सौ दिनों के टारगेट पर सवाल
जयराम सरकार बनते ही शिक्षा विभाग द्वारा तैयार सौ दिनों के टारगेट में 31 मार्च तक प्रदेश के सभी निजी स्कूलों को नियामक आयोग के दायरे में लाने की बात कही गई। अफसरों ने प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर सरकार को सौंप दिया, लेकिन सरकार ने इस संदर्भ में आगामी कदम नहीं उठाए। 31 मार्च तक प्रस्ताव लागू होने की संभावनाएं शून्य नजर आ रही हैं।
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