हिमाचल कैबिनेट बैठक (फाइल फोटो)
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हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की मंगलवार को प्रस्तावित बैठक में निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के लिए बनाया जा रहा प्रस्ताव नहीं रखा जाएगा। विधि विभाग से प्रस्ताव की फाइल नहीं लौटी है। विधि विभाग ने शिक्षा विभाग से प्रस्ताव में संशोधित करने को लेकर कई अन्य जानकारियां भी मांगी है। इसके अलावा हरियाणा और गुजरात सरकार के फीस को लेकर अपनाए जा रहे पैट्रन पर भी मंथन जारी है।
उच्च शिक्षण संस्थानों की फीस तय करने को गठित आयोग की तर्ज पर स्कूलों की फीस तय करने के लिए नया आयोग बनाने का विचार भी चल रहा है। हिमाचल प्रदेश में निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के लिए 1997 के एक्ट में सरकार संशोधन करने जा रही है। विधानसभा के बजट सत्र में एक्ट संशोधित करने को वाई सर्कुलेशन भी आने वाले दिनों में मंत्रियों से इस प्रस्ताव पर साइन करवाए जा सकते हैं।
सरकार ने बजट सत्र में निजी शिक्षण संस्थान नियामक एक्ट 1997 को संशोधित करने का फैसला लिया है। इसके तहत फीस निर्धारण के लिए एसएमसी, अभिभावकों या किसी अन्य कमेटी को शामिल किया जाएगा। वर्तमान एक्ट के तहत निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। निजी स्कूलों की फीस को लेकर लॉकडाउन के दौरान काफी हल्ला हुआ है।
सरकार ने लॉकडाउन के दौरान सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली के निर्देश दिए थे। इन आदेशों के खिलाफ जाते हुए कई निजी स्कूलों ने स्कूल बंद होने के बावजूद कई तरह के फंड वसूले। इसको लेकर पूरे प्रदेश में अभिभावकों ने प्रदर्शन किए। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को कई संगठनों की ओर से निजी स्कूलों के खिलाफ ज्ञापन भी सौंपे गए। इसी कड़ी में सरकार ने निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए 1997 के एक्ट में संशोधन करने का फैसला लिया है।