निजी स्कूल वैन का चालक वीरवार को बीमार था। उसने बच्चों को लाने के लिए अपने बेटे को भेज दिया और नौसिखिए चालक की लापरवाही से हादसा हो गया। अब स्कूल प्रबंधन ने चालक पर ही दुर्घटना का ठीकरा फोड़ दिया है। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि चालक का बेटा वैन चला रहा था।
हालांकि, प्रबंधन ने चेयरमैन की निजी गाड़ी में स्कूल के बच्चों को ढोने पर चुप्पी साध ली है। ग्रामीण बता रहे हैं कि जो युवक वैन चला रहा था वह नाबालिग है। अभी तक स्कूल प्रबंधन गाड़ी के कागजात और चालक का लाइसेंस प्रशासन को नहीं सौंप सका है।
स्कूल प्रबंधन का चालक बालिग होने का दावा भी शक के घेरे में हैं। बताया जा रहा है कि वैन हर दिन ओवरलोड होती थी। स्कूल प्रबंधन को इसकी पूरी सूचना थी। लेकिन, मासूम जिंदगियों की किसी ने परवाह नहीं की।
स्कूल की मुख्याध्यापिका शारदा देवी ने कहा कि वीरवार को वह अवकाश पर थी। उन्होंने कहा कि कुलदीप स्कूल की वैन को चलाता था। लेकिन, वीरवार को उसका बेटा वैन चला रहा था, इसकी जानकारी उन्हें हादसे के बाद मिली।
एसडीएम धर्मपुर एसएस राणा ने स्कूल का रिकार्ड कब्जे में ले लिया है। वीरवार शाम छह बजे एसडीएम स्कूल पहुंचे और उन्होंने पूछताछ के बाद रिकार्ड जब्त किया है। दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी के कागजात और चालक का लाइसेंस शुक्रवार दो बजे तक प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल चेयरमैन सुनील अत्री से संपर्क नहीं हो सका है। हादसे के बाद से उनका नंबर बंद चल रहा है।
हिमाचल में वीरवार को एक और स्कूल वैन हादसे का शिकार हो गई। इसमें एक मासूम की जान चली गई। वैन को नौसिखिया चालक चला रहा था। पांच सीटर वैन में 12 बच्चे ठूंसे हुए थे। यह हाल तब है, जब हाल ही में नूरपुर स्कूल बस हादसे के बाद सरकार ने यातायात नियम तोड़ने और ओवरलोडिंग करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थीं।
नूरपुर स्कूल बस हादसे में 26 बच्चों समेत 28 की मौत हो गई थी। सरकार ने इस हादसे को त्रासदी बताया था। कागजों में स्कूलों तक बच्चों के सुरक्षित सफर के लिए योजनाएं और नीतियां बनीं। यातायात नियम तोड़ने वालों और ओवरलोडिंग करने वालों पर पुलिस का रौब खूब चला, लेकिन सवा दो महीने के बाद ही सब व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौट आई। दो महीने में बच्चों के सुरक्षित सफर को लेकर न कोई ठोस नीति बनी और न यातायात नियम तोड़ने वालों पर सख्ती हो पाई।
इसका नतीजा यह हुआ कि वीरवार को मंडी के धर्मपुर उपमंडल में वीरवार को डरवाड़ हादसा हो गया। इसमें भी ओवरलोडिंग की बात सामने आई है। स्कूल के चेयरमैन के नाम पर दर्ज पांच सीटर वैन में 12 बच्चों को भरा गया था। नौसिखिया चालक वैन चला रहा था।
ओवरलोडिंग के जोखिम के साथ ओवर स्पीड को भी हादसे का कारण बताया जा रहा है। इस हादसे में इससे एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि 11 घायल हैं। इनमें तीन की हालत गंभीर बनी हुई है। वैन चालक को भी चोटें आई हैं। इस हादसे में पूरे सिस्टम की नाकामी साफ तौर पर दिखती है।
स्कूल वैन हादसे की सूचना मिलते ही अभिभावक घटनास्थल पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायल बच्चों को सरकाघाट अस्पताल पहुंचा दिया गया। वहां मासूम बच्चों की तड़प देखकर अभिभावक सुधबुध खोने लगे। बच्चों का स्वास्थ्य बिगड़ता देख सभी को मंडी जोनल अस्पताल रेफर कर दिया। अभिभावक भी रोते बिलखते मंडी जोनल अस्पताल पहुंच गए।
हादसे में घायल हुए बच्चे- आशीष कुमार (9) पुत्र अनिल कुमार गांव चसवाल, आरव (6) पुत्र संजय कुमार गांव चस्वाल, काव्यांश (6) पुत्र गोपाल सिंह गांव गरली, अंशुल (14) पुत्री बलवीर निवासी भड्डू, सारा ठाकुर (8) पुत्री संजय कुमार गांव चस्वाल, मानसी (9) पुत्री बलवीर सिंह गांव भड्डू, भूपेंद्र (5) पुत्र सोनू कुमार निवासी गरली, साक्षी पुत्री सोनू कुमार निवासी गरली और अर्णव पुत्र रमाकांत शामिल हैं। दो बच्चे हमीरपुर के टौणीदेवी में भर्ती हैं।
प्रदेश में कोई बड़ा हादसा होने के बाद चंद दिन तक ही सख्ती होती है, इसके बाद फिर लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ शुरू हो जाता है। नूरपुर स्कूल बस हादसे के बाद भी सरकार ने यातायात नियम कड़े करने को लेकर सख्ती की थी, लेकिन फिर नियमों का उल्लंघन होना शुरू हो गया। मंडी के धर्मपुर के डरवाड़ में हुआ स्कूल वैन हादसे में भी ओवरलोडिंग की बात सामने आई है। पांच सीटर वैन में 12 बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया गया था।
बीते 9 अप्रैल को हुए नूरपुर बस हादसे के बाद सरकार ने यातायात नियमों को कड़ा करने की घोषणा की थी। इसके तहत हर महीने स्कूल प्रबंधन के साथ पुलिस और आरटीओ की बैठक होनी थी।
इसमें स्कूल प्रबंधन की ओर से की गई व्यवस्था को जांचा जाना था, लेकिन सरकार की यह सख्ती दो सप्ताह तक ही रही। हिमाचल के स्कूलों में फिर से पहले जैसी स्थिति बन गई है। उधर, परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
कहां गए ये नियम
- स्कूल प्रबंधन का एक कर्मचारी, अध्यापक छात्रों को टैक्सी तक पहुंचाएगा
- टैक्सी में सीट के मुताबिक छात्रों को बिठाया जाएगा
- वाहन पर बड़े अक्षरों में स्कूल टैक्सी का लिखना होगा
- टैक्सी के भीतर ही छात्रों के बैग रखने की व्यवस्था करना
- बसों में पीली पट्टी और बड़े अक्षरों में स्कूल बस लिखना
- स्कूलों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करना
- कैमरे के सामने बच्चों को टैक्सी में बिठाना