राजधानी शिमला के लोकल रूटों पर चल रही प्राइवेट बसों में सफर करने वाले यात्री ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं। ठंड के मौसम में निजी बस आपरेटर टूटे शीशों वाली बसों को लोकल रूटों पर चला रहे हैं। शहर में चल रही कुछ बसों के तो पूरे के पूरे शीशे गायब हैं।
बिना शीशों वाली बसों में सफर के दौरान यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। यही नहीं अधिकतर बसों में अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था भी नहीं है।
सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है लेकिन निजी बस आपरेटरों ने अभी तक बसें दुरुस्त नहीं की हैं। बसों की खिड़कियों में शीशे न होने से यात्रियों को धूल मिट्टी और सर्द हवाओं के चलते परेशानी झेलनी पड़ती है।
यात्री यदि ड्राइवर और कंडक्टरों से बसों में शीशे लगाने के लिए कहें तो जवाब मिलता है कि जब टाइम मिलेगा लगवा देंगे। ड्राइवर कंडक्टर यात्रियों से दुर्व्यवहार करने से भी गुरेज नहीं कर रहे। शहर में लोकल रूटों पर चल रही निजी बसों सहित लांग रूट पर रवाना होने वाली निजी बसों की भी स्थिति खस्ताहाल है।
बस आपरेटर प्राइवेट बसों में शीशों की जगह पलाई लगा कर काम चला रहे हैं। हवा से पलाई आधे रूट में ही छूट जाती हैं, यात्री खिड़की का प्रयोग नहीं कर पाते।
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत पैसेंजर (यात्री) वाहन को टूटी फूटी हालत में चलना अनसेफ कंडीशन की श्रेणी में आता है। अनसेफ कंडीशन में वाहन पकड़े जाने पर 1000 रुपये के चालान का प्रावधान है।
जिस बस में आप सफर कर रहे हैं अगर उसकी खिड़की का शीशा खराब है तो उसकी मोबाइल क्लिप हमें हमारे व्हट्स एप नंबर 94594-83666 या हमारे ईमेल aushimla@gmail.com पर बस का नंबर, रूट और अपने नाम के साथ भेजें।
उपनिदेशक, परिवहन विभाग कैप्टन रमन कुमार शर्मा टूटे शीशों के साथ बसों को रूटों पर चलाना मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है। बसों का निरीक्षण कर नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।