हड़ताल को लेकर हिमाचल निजी बस ऑपरेटर यूनियन दूसरे दिन ही बंट गई। मंगलवार को प्रदेश के आठ जिलों में हड़ताल का व्यापक असर दिखा, जबकि जिला शिमला, किन्नौर और चंबा में निजी बस ऑपरेटरों ने सेवाएं देनी शुरू कर दी।
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हड़ताल के चलते प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में लोगों खासकर मरीज, मुलाजिम और विद्यार्थी वर्ग को दिक्कतें झेलनी पड़ीं। हालांकि एचआरटीसी प्रबंधन ने इन जिलों में अतिरिक्त बसें भी चलाईं, लेकिन व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई।
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जिला हमीरपुर में निजी बस ऑपरेटरों ने धरना प्रदर्शन भी किया, जबकि अन्य जिलों में ऑपरेटरों ने शांतिपूर्वक रोष प्रकट किया।
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यूनियन प्रदेशाध्यक्ष राजेश पराशर ने बताया कि यूनियन पदाधिकारी अपनी मर्जी से ही मुख्यमंत्री के साथ बैठक करने चले गए। सीएम के आश्वासन के बाद इन्होंने मिठाइयां तक बांट दीं। मैदानी इलाकों की जिला यूनियनों ने इसका विरोध किया है।
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सीएम की बैठक में उपस्थित यूनियन के महासचिव रमेश कमल ने बताया कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त की गई। जिला हमीरपुर में प्रधान नरेश कुमार ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो बुधवार को चक्का जाम करेंगे।
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कांगड़ा में भी हड़ताल जारी रही। निजी बसें नहीं चलने से लोगों को एचआरटीसी बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ा। यात्री बस स्टॉप पर बसों के लिए इंतजार करते रहे
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ऊना और मंडी, कुल्लू जिले में हड़ताल से परेशानी हुई। हड़ताल से 300 रूट प्रभावित हुए। एचआरटीसी सर्व कर्मचारी यूनियन के महासचिव खमेंद्र गुप्ता ने बताया कि अगर सरकार किराया बढ़ाने के पक्ष में है तो वह निजी बसों का ही किराया बढ़ाए।
एचआरटीसी पहले से तय किराये पर बसें चलाने को तैयार है। उधर प्रधान सचिव परिवहन जीसी शर्मा ने बताया कि हड़ताल से जनता को कोई परेशानी नहीं हुई है। सवारियों के लिए अतिरिक्त बसें चलाई गई हैं।