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Shimla: उप मुख्यमंत्री के बयान पर भड़के निजी बस ऑपरेटर, हड़ताल की दी चेतावनी

Thu, 27 Mar 2025 05:47 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

सदन में उप मुख्यमंत्री की ओर से रविवार को बसें न चलाने पर परमिट रद करने की चेतावनी से निजी बस ऑपरेटर भड़क गए हैं।
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निजी बसें(फाइल)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई का एलान कर दिया है। बुधवार को सदन में उप मुख्यमंत्री की ओर से रविवार को बसें न चलाने पर परमिट रद करने की चेतावनी से निजी बस ऑपरेटर भड़क गए हैं। बस ऑपरेटरों ने वर्चुअल बैठक कर बसें खड़ी कर हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने निजी बस ऑपरेटरों को वर्किंग कैपिटल में सब्सिडी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई राहत नहीं दी गई। अब वह धमकाने पर उतर आई है। सरकार ने निजी बस ऑपरेटरों को एचआरटीसी के रूट परमिट देने का एलान किया था, लेकिन एचआरटीसी नियमों के विपरीत रूट परमिट सरेंडर कर रहा है। इससे निजी ऑपरेटरों के साथ धोखा हुआ है।

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यूनियन के महासचिव रमेश कमल ने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए 3 साल हो रहे हैं लेकिन प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर को अभी तक कोई भी सुविधा प्रदान नहीं की है। सरकार ने पहले 3 रुपये प्रति लीटर डीजल के रेट में इजाफा कर दिया। प्रदेश में आपदा आई तो सरकार ने 3 रुपये प्रति लीटर डीजल का मूल्य बढ़ाया। अब सरकार निजी बस ऑपरेटरों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी बसों में महिलाओं को किराये में 50 फीसदी छूट दी जा रही है, उससे निजी ऑपरेटरों को नुकसान हो रहा है। पूर्व भाजपा सरकार ने कोविड के दौरान निजी बस ऑपरेटरों को बसें चलाने के लिए प्रति बस 2 लाख रुपये वर्किंग कैपिटल के रूप में बैंक से लोन दिलवाया था, जिसके एवज में प्रदेश सरकार द्वारा बैंक के ब्याज में सब्सिडी के तौर पर राहत देनी थी।

लेकिन मौजूदा सरकार ने उस पर अभी तक कोई भी निर्णय नहीं लिया। दूसरी ओर, एआरचटीसी ने 2008 के बाद एसआरटी जमा नहीं कराया और उसके परमिट रिन्यू किए जा रहे हैं, नए परमिट भी दिए जा रहे हैं। रमेश कमल ने कहा है कि यूनियन कई बार सरकार से न्यूनतम किराए में कम से कम 15 रुपये बढ़ोतरी की मांग कर चुकी है। यह हिमाचल में देश में सबसे कम है। निजी बस ऑपरेटर द्वारा अगर एसआरटी जमा करने में थोड़ा विलंब हो जाए तो परिवहन विभाग बस जब्त कर लेता है जबकि एचआरटीसी पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। निजी ऑपरेटर को मोटर वाहन कराधान अधिनियम में 50 फीसदी टैक्स जमा करने का प्रावधान भी है, उसकी भी राहत नहीं दी जा रही।

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