सरकारी स्कूलों में दी जाने वाली स्मार्ट स्कूल वर्दी की गुणवत्ता जांचने वाली प्रक्रिया को और कड़ा किया जाएगा। दोन-तीन बार धुलाई में कई जगह वर्दी के रंग फीके पड़ने की शिकायतों पर प्रधान सचिव शिक्षा केके पंत ने कड़ा संज्ञान लिया है।
बुधवार को विभागीय अधिकारियों से बैठक करते हुए उन्होंने हर शिकायत पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि अगले साल के लिए जांच प्रक्रिया को और सुदृढ़ करने के लिए कदम उठाए जाएं।
बुधवार को सचिवालय में दोपहर 12 से दो बजे तक प्रधान सचिव ने स्मार्ट स्कूल वर्दी को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि हर स्कूल में जब दिल्ली की लैब से सैंपल चैक करवाने के बाद वर्दी बांटी गई तो गुणवत्ता पर सवाल क्यों उठ रहे हैं।
उन्होंने शिक्षा निदेशालय को हर उस स्कूल से रिपोर्ट तलब करने को कहा जहां-जहां से वर्दी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। भविष्य के लिए खरीदी जाने वाली वर्दी की प्रक्रिया के नियमों को सख्त करने के भी उन्होंने आदेश दिए।
बता दें कि निजी स्कूलों का मुकाबला करने के लिए प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चों को पहली बार दी गई स्मार्ट स्कूल वर्दी का रंग उतरने लग पड़ा है। कांगड़ा, मंडी और सोलन जिले से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में इसको लेकर शिकायत दर्ज करवाई गई हैं।
दो-तीन बार धोने पर पैंट और कमीज के रंग फीके पड़ने का अभिभावकों ने आरोप लगाया है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 8.30 लाख विद्यार्थियों को अटल स्कूल वर्दी योजना के तहत पहली बार स्मार्ट वर्दी दी गई है। साल 2018-19 के लिए 57.90 करोड़ से स्मार्ट वर्दी की खरीद की गई है।