उस समय भवन की व्यवस्था न होने के चलते बनी दुकान में ही कक्षाएं शुरू कर दी गईं। पांच सालों से स्कूल को न ही अपना भवन मिला और न ही नए भवन में शिफ्ट हुआ। इसके चलते स्कूल में छात्रों की संख्या भी नहीं बढ़ रही है। डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि मामला उनके ध्यान में आया है। जल्द ही संज्ञान लिया जाएगा।
दुकान होने के चलते इसे सड़क के किनारे बनाया गया है। दिन भर रेत-बजरी लाने वाले ट्रैक्टर ट्राली, टिपर और अन्य वाहन यहां से गुजरते हैं। इससे छोटे बच्चों के साथ दुर्घटना होने का खतरा हमेशा बना रहता है। स्कूल के साथ दुकानें भी हैं, जिनमें पूरा दिन कटर चलता रहता है। इससे बच्चों को भारी परेशानियां होती हैं।
अध्यापिका लता कुमारी ने बताया स्कूल भवन के लिए जमीन चिह्नित होकर शिक्षा विभाग के नाम हो चुकी है। बाउंड्री वॉल के लिए कुछ पैसा भी मंजूर हुआ है, लेकिन अभी तक निशानदेही नहीं हो पा रही है। स्कूल भवन के लिए पैसा आना भी अभी बाकी है। बजट का इंतजार है।