आज भी शिमला शहर को मिलता है योजना से पानी
राष्ट्रपति के दौरे से पहले पेयजल कंपनी तैयारियों में जुटी अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिल्स क्वीन के दौरे पर आ रहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुमू अंग्रेजों की बनाई पहली पेयजल योजना देखने सियोग जाएंगी। पेयजल कंपनी ने इस दौरे के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
राष्ट्रपति को इस परियोजना के इतिहास के बारे में बताया जाएगा। साथ ही 150 साल पहले इस योजना को बनाने की तकनीक की भी जानकारी दी जाएगी। शिमला की यह पहली पेयजल योजना इसलिए भी खास है क्योंकि सबसे पहले इसका पानी एडवांस स्टडी भवन में रहने वाले सिर्फ ब्रिटिश शासकों के लिए सप्लाई किया जाता था। बाद में इसका पानी शहर के बाकी इलाकों में भी दिया जाने लगा। सियोग का पानी शिमला की सभी पेयजल परियोजनाओं में सबसे शुद्ध माना जाता है। शिमला की हरी भरी हसनवैली की वादियों के बीच सियोग में कुल 17 पानी के चश्मे हैं। इसके लिए यहां नौ एमएलडी यानि 90 लाख लीटर की क्षमता वाला विशालकाय टैंक बनाया है। अंग्रेजों ने यहीं पर पानी शुद्ध करने के लिए भी अलग अलग डैमनुमा टैंक बनाए थे। यहां से शिमला के लिए पेयजल लाइन बिछाई गई है। यह लाइन ढलान पर बिछी है और टैंक से शिमला तक पानी पहुंचाने के लिए किसी तरह की पंपिंग की भी जरूरत नहीं है। अब यह क्षेत्र वन्यजीव विभाग के अधीन है। यहां आम लोगों के वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी है।
पेयजल कंपनी कर रही है जीर्णोद्धार
वर्तमान में इस योजना से शिमला शहर के लिए महज 0.12 एमएलडी पानी मिल रहा है। इसकी क्षमता ज्यादा है और बरसात में इससे पांच एमएलडी तक पानी शहर को मिल सकता है। लेकिन इसके लिए पुरानी पाइपलाइनों को बदला जाना जरूरी है। कंपनी इसका काम शुरू कर चुकी है। सियोग के टैंक को भी दुरुस्त कर लिया है। कंपनी के महाप्रबंधक राजेश कश्यप का कहना है कि जल्द ही इसका काम पूरा किया जाएगा।