फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla: तारादेवी मंदिर में पंक्ति में बैठाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भंडारा परोसने की तैयारी

Mon, 06 May 2024 10:34 AM IST
Krishan Singh रीतिका शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

प्रदेश के दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को राजधानी शिमला के प्रसिद्ध संकटमोचन और तारादेवी मंदिर जाएंगी और पूजा-अर्चना करेंगी। 
विज्ञापन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश के दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को राजधानी शिमला के प्रसिद्ध संकटमोचन और तारादेवी मंदिर जाएंगी और पूजा-अर्चना करेंगी। इस दौरान तारादेवी मंदिर परिसर में विशेष भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रपति की अनुमति के बाद उन्हें पंक्ति में बैठाकर या टेबल पर भंडारा परोसने की तैयारी है।   भंडारे में राष्ट्रपति सेपू बड़ी, मीठा बदाणा, मालपुए, राजमा और कढ़ी-चावल समेत दस हिमाचली व्यंजनों का स्वाद चखेंगी। मंदिरों के प्रस्तावित दौरे में राष्ट्रपति मुर्मू सबसे पहले मंगलवार सुबह 11:25 बजे बाबा नीब करौरी की तपस्थली संकटमोचन मंदिर में माथा टेकेंगी।

विज्ञापन


यहां सबसे पहले षोडश गणेश मंदिर में गणपति को पुष्प अर्पित करेंगी। इसके बाद राम दरबार में पूजा-अर्चना करेंगी। राष्ट्रपति भगवान राम और माता सीता को हलवे का भोग लगाएंगी। इसके साथ ही बजरंगबली की पूजा और आरती होगी। बजरंगबली को सिंदूर चढ़ाने के बाद बदाणे का भोग लगाया जाएगा। दोपहर 12:20 बजे तारादेवी मंदिर पहुंचकर माता तारादेवी के दर्शन करेंगी। मंदिर परिसर में भंडारा ग्रहण करने के बाद दोपहर बाद  2:00 बजे मंदिर से वापस राष्ट्रपति  निवास आएंगी।  संकटमोचन और तारादेवी मंदिर दौरे के दौरान राष्ट्रपति इन मंदिरों के इतिहास से भी रूबरू होंगी। मंदिर प्रशासन राष्ट्रपति को दोनों मंदिरों के इतिहास से अवगत करवाएगा। 

विज्ञापन

मुर्मू होंगी तारादेवी मंदिर जाने वाली पहली राष्ट्रपति 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तारादेवी मंदिर जाने वाली पहली राष्ट्रपति होंगी, जबकि संकटमोचन मंदिर जाने वाली अब तक की दूसरी राष्ट्रपति होंगी। इससे पहले राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा संकटमोचन मंदिर जा चुके हैं।

मंदिर का जानेंगी इतिहास
मंदिर में तारादेवी की अष्टादस भुजाओं और अष्टधातु से बनी मूर्ति विराजमान है। जुन्गा के राजा बलवीर सेन ने माता के दर्शन पाकर इस मंदिर का निर्माण करवाया था। अष्टधातु से बनी माता की मूर्ति को जुन्गा से तारादेवी एक दिन में शंकर नाम हाथी पर लाया गया था। वर्तमान में तारादेवी जुन्गा के राजा खुश सेन की कुलदेवी हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें