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अनाप शनाप बयानबाजी से माहौल तनावपूर्ण कर रहे सीएम: धूमल

Mon, 19 Dec 2016 09:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नादौन (हमीरपुर)
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पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान लोक महत्व के मुद्दों पर चर्चा न हो, इसके लिए सत्र शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री अनापशनाप टिप्पणी कर रहे हैं। नादौन में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि अनापशनाप बयानबाजी से माहौल तनावपूर्ण हो जाता है और सदन में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा नहीं हो पाती है।
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कहा कि मुख्यमंत्री माहौल तनावपूर्ण कर अहम मुद्दों से बचना चाहते हैं। सत्र में विपक्ष लोकहित के मुद्दों के अलावा भ्रष्टाचार, माफियाराज, भू, वन, शराब और तबादला माफिया जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। विधायकों पर नियंत्रण की बात करते हुए धूमल ने कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री या मंत्री पहले विधायक होता है। वह हमेशा चुने हुए विधायकों को बराबर मानते हुए उनसे सहयोग के साथ उनका सम्मान करते हैं।

कहा कि नियंत्रण करने की बात रजबाड़ाशाही की मानसिकता है। आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का अपने मंत्रिमंडल पर कोई नियंत्रण नहीं है। मंत्रियों को सचिवालय में लोगों की सुविधा के लिए चार दिन बैठने का आदेश दिया गया था, लेकिन किसी ने भी सीएम की बात नहीं मानी।
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लोग जानते हैं कि किसका किस पर कितना नियंत्रण है। उन्होंने कहा कि भोरंज हलके का उपचुनाव चाहे विधानसभा के आम चुनावों से पहले हो या साथ में, जीत भाजपा की निश्चित है। कहा कि कुल्लू घाटी में आईएसआईएस का जासूस पकड़ा जाना प्रदेश के लिए चिंता का विषय है।
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स्वार्थ के लिए पगड़ी उछालने में देर नहीं लगाते सीएम: भाजपा

भाजपा उपाध्यक्ष गणेश दत्त ने कहा है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपने स्वार्थ के लिए कभी भी किसी की पगड़ी उछालने में देर नहीं लगाते, चाहे केंद्रीय मंत्री या अपने ही सहयोगी मंत्री की क्यों न हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और सांसद अनुराग ठाकुर को एक ही चट्टे बट्टे के हैं, कहकर केंद्रीय मंत्री का अपमान किया है।

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह 6 बार के मुख्यमंत्री है तथा जनता उनसे अच्छे व्यवहार की अपेक्षा रखती है। लेकिन पिछले 4 वर्षों में उनके कार्यकाल में एक भी ऐसा अवसर देखने को नहीं आया जब उन्होंने अपने कद के अनुसार टिप्पणी की हो। अरुण जेटली एक उच्च कोटि के वकील हैं तथा भारत सरकार में वित्त मंत्री भी हैं, उनके प्रति मुख्यमंत्री का दुराग्रह उनकी सरकार बनने के पहले दिन से रहा है।

जब वह अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर अरुण जेटली पर लगातार आरोप लगाते आए हैं। लेकिन जैसे ही केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो वीरभद्र सिंह ने अरुण जेटली के विरुद्ध मानहानि के केस को वापस ले लिया था। इस प्रकार एक ओर आरोप लगाना, दूसरी ओर मानहानि का केस वापस लेना मुख्यमंत्री के दोगलेपन को दर्शाता है। भाजपा उपाध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान सरकार के दिन अब गिनती के रह गए हैं।
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