पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि आखिरकार बिल्ली थैले से बाहर आ ही गई। मुख्यमंत्री के बयान से स्पष्ट है कि धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाने की घोषणा राजनीतिक शोशेबाजी के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।
वह अपनी बातों से कांगड़ा की जनता की भावना से खिलवाड़ ही कर रहे थे। भाजपा नेताओं ने कहा कि अपने बयानों और घोषणाओं से पलट जाना मुख्यमंत्री की पुरानी आदत है, लेकिन गंभीर मसलों पर जनता से मजाक करने के मुख्यमंत्री के नए शौक ने प्रदेश की शासकीय प्रणाली को ही देशभर में उपहास का विषय बना दिया है।
मजाक ही मजाक में मुख्यमंत्री ने धर्मशाला को दूसरी राजधानी घोषित कर दिया और दफ्तर शिफ्ट और अन्य बदलाव न करने की घोषणा कर दी है। धूमल ने कहा कि कांग्रेस सरकार का चार वर्ष का कार्यकाल जनता से मजाक करने में ही व्यतीत हो गया है।
आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ जनता जो मजाक करने वाली है, कांग्रेस शायद ही उससे उबर पाएगी। भाजपा नेताओं ने कहा कि व्यक्तिवाद, जातिवाद और क्षेत्रवाद की राजनीति करने वाली कांग्रेस के हाथों प्रदेश का समान विकास संभव नहीं है।
यह भाजपा की ही सरकार थी कि धर्मशाला में दो-दो सचिवालय खोले थे और हर सप्ताह एक मंत्री वहां बिठाया जाता था। इसके अतिरिक्त विकास के नाम पर ऊपर का हिमाचल व नीचे के हिमाचल की कांग्रेस की राजनीति को पूरी तरह खत्म करने का श्रेय भी भाजपा को है।