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धूमल बोले- सरकार संवेदनहीन, जनता की मुसीबत से भागते रहे हैं वीरभद्र

Fri, 13 Jan 2017 10:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश सरकार संवेदनहीन हो चुकी है। बर्फबारी के 6 दिन बाद भी शिमला सहित ऊपरी क्षेत्रों में जीवन अस्त व्यस्त है। स्थिति सामान्य करने के बजाय सरकार बयानों से जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने का प्रयास कर रही है।
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समस्याओं के प्रति मुख्यमंत्री की संवेदनहीनता इस बात से स्पष्ट होती है कि जब पीलिया फैला तो मुख्यमंत्री शिमला से बाहर थे और अब जब भारी बर्फबारी हुई है तो भी समस्याओं से भागते नजर आ रहे हैं। धूमल बद्दी में आयोजित कार्यसमिति की बैठक में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुशासन व भ्रष्टाचार से प्रदेश की जनता परेशान है। वह सत्ता परिवर्तन चाहती है, ऐसे में अति आवश्यक है कि हमें विधानसभा चुनाव जीतने के लिए अपने बूथ पर संगठन को मजबूत करना होगा।
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उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जो कार्य ढाई साल में किए हैं, वह कांग्रेस 60 वर्षों में नहीं कर पाई है। आज ऐसा कोई वर्ग नहीं है जिसके उत्थान के लिए एनडीए सरकार ने योजनाएं शुरू न की हों। धूमल ने कहा कि भाजपा चार्जशीट को कांग्रेस नेता कूड़ेदान में फेंकने की बात करते हैं लेकिन अब जब इस चार्जशीट को घर-घर तक पहुंचाया जाएगा तो लोग कांग्रेस को रद्दी की टोकरी में फेंकने की बात करेंगे।

धूमल ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए केंद्र सरकार हिमाचल को अपार धनराशि दे रही है। विशेष राज्य के दर्जे को बहाल करने से प्रदेश को करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ पहुंचेगा। 14वें वित्तायोग में पूर्व के भेदभाव को पीछे छोड़ते हुए 235 प्रतिशत की वृद्धि दी गई और हिमाचल को 40625 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। आने वाले 5 वर्षों में हिमाचल को केंद्रीय आर्थिक सहायता के रूप में 75,000 करोड़ रुपये का धन मिलेगा।

धूमल ने कहा कि नोटबंदी के खिलाफ  कांग्रेस नेता दिल्ली गए और भूमि अधिग्रहण की एवज में 10 गुणा मुआवजे की मांग को लेकर राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया। लेकिन प्रदेश के कांग्रेसी यह बताएं कि आखिर क्या कारण है कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा चार गुणा मुआवजा दिए जाने के बावजूद प्रदेश के लोगों को मात्र दो गुणा मुआवजा दिया जा रहा है?

धूमल ने कहा कि कांग्रेस ने पंचायत प्रतिनिधियों के आर्थिक व वित्तीय अधिकार छीनकर उन्हें अपमानित करने का कार्य किया है। पंचायतों के विकास के लिए मिले पैसों के लिए अड़चनें लगाई जा रही हैं। एनडीए सरकार ने प्रत्येक पंचायत के विकास के लिए 80 लाख रुपये का आवंटन करने का निर्णय लिया है, कहीं श्रेय भाजपा को न मिले, इस वजह से इन कार्यों को सिरे नहीं चढ़ने दिया जा रहा है।
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