पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कोटखाई मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सीबीआई जांच की सिफारिश पर सवाल उठाया है। कहा कि एक पत्र लिखने से कुछ नहीं होता। सीबीआई जांच के लिए अधिसूचना जारी करनी पड़ती है।
मुख्यमंत्री ने सीबीआई को पत्र 15 जुलाई को लिखा है, जबकि इस पर तारीख 14 जुलाई की अंकित है। हमीरपुर में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग जेल में भी सुरक्षित नहीं हैं।
जेल में मुख्य अपराधी के साथ सरकारी गवाह को एकसाथ रखना और उसकी मौत होना सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़ा कर रहा है। कहा कि इस केस में संलिप्त प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए सिलसिलेवार सबूतों को खत्म किया जा रहा है।
मामले से ध्यान हटाने को कांग्रेसी झूठे आरोप लगा रहे हैं कि लोगों को धरना प्रदर्शन के लिए भाजपा पैसे दे रही है। कहा कि गुड़िया को इंसाफ दिलवाने के लिए 20 जुलाई को प्रदेश भाजपा ने शिमला बंद का आह्वान किया है।
उन्होंने शिमला के लोगों से बंद के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। कहा कि बीजेपी 21 जुलाई से प्रदेश के सभी 17 संगठनात्मक जिलों में धरना प्रदर्शन करेगी।
यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक गुड़िया केस के आरोपियों को सजा नहीं मिल जाती और मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देते या प्रदेश सरकार बर्खास्त नहीं हो जाती।