पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह के सामने प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की नाकामियां गिनाकर गैर राजनीतिक कार्यक्रम का माहौल गरमा दिया। इससे कुछ देर तो स्वास्थ्य मंत्री दंग रह गए लेकिन जैसे ही पूर्व मुख्यमंत्री का भाषण खत्म हुआ तो मंच पर दोनों नेता काफी देर तक गुफ्तगू करते रहे।
दोनों नेताओं के सियासी भाषण के दौरान मंच पर विराजमान राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने संतुलन बनाकर माहौल को शांत करवाया। शुक्रवार को उपमंडल भोरंज के दिम्मी में पार्वती एजूकेशन एंड हेल्थ सोसाइटी और सर गंगाराम अस्पताल के संयुक्त तत्वाधान में खुले अस्पताल का उद्घाटन कार्यक्रम था।
मंच पर मुख्यातिथि राज्यपाल आचार्य देवव्रत के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह समेत अन्य नेता और पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। पहले स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर को मंच पर बोलने का मौका मिला तो उन्होंने प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
कहा कि प्रदेश सरकार विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में सुदृढ़ एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है। गत चार वर्षों के दौरान अनेक चिकित्सा संस्थान खोले गए और ग्रामीण क्षेत्रों में ही 32 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को नागरिक अस्पतालों में स्तरोन्नत किया गया। लेकिन, इसके बाद जैसे ही पूर्व मुख्यमंत्री को मंच पर बोलने आए तो उन्होंने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की एक के बाद एक नाकामी को लोगों के सामने उजागर कर दिया।
धूमल ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का दर्जा तो बढ़ा दिया, लेकिन प्रदेश के तकरीबन सभी अस्पतालों में मेडिकल और पैरा मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है। मरीजों को इलाज के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। सिर्फ अस्पतालों के बाहर फट्टे लगाने से जनता का भला नहीं होने वाला।
उन्होंने कहा कि दिल के इलाज के लिए 35 से 50 हजार रुपये में मिलने वाला स्टंट अब मोदी सरकार में महज 8 से 10 हजार रुपये में मिल रहा है। धूमल के इस भाषण से स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह काफी परेशान दिखे लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की।