धूमल ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने ब्यूरोक्रेट्स की नियुक्तियों को विवादास्पद बना दिया है।
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने ब्यूरोक्रेट्स की नियुक्तियों को विवादास्पद बना दिया है। हालत यह है कि प्रदेश की जनता तो कांग्रेस सरकार से दुखी है ही, अधिकारी वर्ग भी सरकार से परेशान हैं।
अब तो सरकार के फैसलों को देख कर अफसशाही का सरकार से विश्वास ही उठ गया है। सरकार ने प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ-साथ चुनाव आयुक्त की पोस्ट का भी मजाक बना दिया है। अखिल भारतीय सरकारी चालक संघ के सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे धूमल यह बात पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रिटायर हुए तो उन्हें चुनाव आयुक्त के पद पर बिठा दिया गया। फिर अब जब मुख्य सचिव रिटायर हुए हैं तो चुनाव आयुक्त को हटाकर उन्हें मुख्यमंत्री का राजनीतिक सलाहकार नियुक्त कर दिया। जबकि पिछले महीने रिटायर हुए मुख्य सचिव को चुनाव आयुक्त बना दिया है।
किसने बनाई, किसने जारी की मंत्री की सीडी
धूमल ने कहा कि पिछले दिनों प्रदेश में हंगामा मचाने वाली एक कैबिनेट मंत्री की सीडी किसने बनाई, किसने उसे जारी किया और उसे जारी करने का वक्त क्या था।
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धूमल ने कहा कि चुनाव आयुक्त का पद पांच साल के लिए होता है, ताकि वह निष्पक्षता के साथ अपना काम कर सके। धूमल ने कहा कि केंद्र ने हिमाचल को एम्स जैसा स्वास्थ्य संस्थान और पांच मेडिकल कॉलेज दिए हैं।
इसके अलावा भी पिछले दो साल में हिमाचल के विकास के लिए हर संभव मदद दी गई है। लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री और कुछ मंत्री लगातार केंद्र के खिलाफ गलत प्रचार कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
धूमल ने कहा कि पिछले दिनों प्रदेश में हंगामा मचाने वाली एक कैबिनेट मंत्री की सीडी किसने बनाई, किसने उसे जारी किया और उसे जारी करने का वक्त क्या था। इस सबकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले के संबंध में चैप्टर क्लोज का बयान देकर इसे ढकने का प्रयास किया जा रहा है।
लेकिन प्रदेश की जनता इसकी सच्चाई जानना चाहती है। देश में भाजपा के खिलाफ फोन टैपिंग का ढिंढोरा पीटने वालों को इस मामले का पर्दाफाश करना चाहिए। सत्ता संभालने के बाद कांग्रेस कभी 1400 फोन टैप होने के दावे करती रही, कभी 1372, लेकिन बाद में निकले दो। उनकी भी जांच बीच में छोड़ दी गई।