देखा जाएगा कि क्या लाहौल में भी निमेटोड वायरस तो नहीं है। अगर लाहौल की मिट्टी में वायरस नहीं मिलता है तो प्रदेश को बड़ी राहत मिलेगी। बीते साल कृषि मंत्रालय ने सूबे के आलू में सूत्र कृमि (निमेटोड) पाए जाने पर साल 2024 तक हिमाचल के आलू बीज को प्रतिबंधित किया था।
शिमला के सबसे बड़े आलू उत्पादन क्षेत्र कुफरी और फागू में सबसे ज्यादा यह वायरस पाया गया था। इसके चलते ही इस साल कृषि विभाग ने कुफरी में आलू का बीज नहीं लगाया।
लाहौल की मिट्टी में वायरस नहीं मिलने पर केंद्र ने लाहौल के आलू बीज पर लगाए प्रतिबंध को हटा दिया था। इसी कड़ी में कृषि विभाग ने इस साल दोबारा से लाहौल की मिट्टी की जांच करवाने का फैसला लिया है।
कृषि विभाग के निदेशक देसराज शर्मा ने बताया है कि जालंधर से आलू बीज मंगवाने पर विचार चल रहा है। सरकार से चर्चा करने के बाद इस बाबत अंतिम फैसला लिया जाएगा। लाहौल की मिट्टी की भी जल्द जांच की जाएगी।