जिला ऊना में मौसम की मार से आलू की 50 प्रतिशत फसल पहले ही तबाह हो चुकी है। इसके साथ कई किसानों के खेत भी अत्यधिक पानी के कारण बह गए थे। जिससे किसानों को दोबारा से खेत तैयार कर आलू की फसल की बिजाई करनी पड़ी थी। इस मौसम की मार के कारण हर तीसरे छोटे किसान को कम से कम 5 से 20 हजार रुपये और बड़े किसानों को 4 से 8 लाख रुपये तक की क्षति हुई थी।
समय पर निकाले आलू की फसल- कृषि उपनिदेशक सुरेश कपूर ने बताया कि कोई भी किसान आलू की फसल के कम होते मूल्यों के कारण समय से पहले आलू की फसल की पटाई न करें। क्योंकि आलू की फसल का निर्धारित समय दो माह है। अगर किसान दो माह से पहले आलू की फसल की पटाई करते हैं तो किसानों को आलू की फसल की उचित पैदावार नहीं मिल पाएगी।