गेयटी थियेटर में जिला स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी का आगाज, टिकटों में दिखा शिमला का इतिहास
आधुनिकता के दौर में भी डाक टिकट बने हैं आकर्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम के इस दौर में पुराने डाक टिकट, पोस्टकार्ड और पोस्टमार्क लोगों को उस समय की याद दिला रहे है जब चिट्ठियां ही संवाद का जरिया हुआ करती थीं।
लोगों में आज भी उस दौर की तरह डाक टिकट एकत्रित करने का क्रेज बना हुआ है। शहर के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में मंगलवार को इसका प्रमाण देखने को मिला। हॉल में शिमला डाक मंडल की ओर से सिम्पेक्स-2026 जिला स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सुशील ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रदर्शनी में संग्रहकर्ताओं ने 58 फ्रेमों में अपने संग्रह प्रदर्शित किए हैं। प्रदर्शनी में युवा पीढ़ी और स्कूली बच्चों को डाक टिकटों की इस पुरानी और रोचक दुनिया को करीब से देखने का मौका मिल रहा है।
प्रदर्शनी में शिमला के इतिहास और ब्रिटिशकाल के टिकटों सहित उस समय की बनी इमारतों और ऐतिहासिक धरोहरों के मूल फोटो प्रदर्शित किए हैं। स्कूली बच्चों ने भी अपने संग्रह प्रदर्शित किए हैं। पुराने टिकटों और डाक सामग्री के जरिये उस दौर की कई यादें यहां संजोई गई हैं। इसमें केवल शिमला जिले के निवासियों की प्रविष्टियों को शामिल किया है। 16 स्कूलों के विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया है। इस अवसर पर प्रवर अधीक्षक डाकघर, शिमला मंडल कंचन सिंह चौहान, उप डाक अधीक्षक देवराज और प्रवर डाकपाल मनोहर लाल सहित डाक विभाग के अन्य अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
डाक टिकटों में दिखा ब्रिटिश इंडिया का इतिहास
डाक टिकट प्रदर्शनी में अपना संग्रह प्रस्तुत करने वाली नीलम चंदेल ने बताया कि वह सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उन्होंने सात साल की उम्र से टिकट एकत्रित करना शुरू किया था। ऐतिहासिक डाक टिकट एकत्रित करना उनका शौक है। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए भूगोल विषय से संबंधित डाक टिकट और पोस्टकार्ड प्रदर्शित किए हैं। इनमें विभिन्न नदियां, पहाड़ियां, फ्लोरा-फौना शामिल हैं। हिमाचल फिलाटेली क्लब की फाउंडर मेंबर, अध्यक्ष और संग्रहकर्ता मेजर डॉ. रितू कालरा ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिकट कलेक्शन के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं। उन्होंने ब्रिटिश इंडिया की 1854 की पहली रंगीन स्टैंप से लेकर क्वीन विक्टोरिया के शासनकाल और तीन पैसे से लेकर 25 पैसे तक की डाक टिकटें प्रदर्शित की हैं।