हर साल बोर्ड परीक्षाओं की परिणाम घोषित होते ही जैसे ही सरकार कम परिणाम देने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करती है तो शिक्षक संगठन विरोध में लामबंद हो जाते हैं। शिक्षकों के विरोध के आगे सरकारें भी हर साल नतमस्तक होकर फैसला वापस लेती रही हैं।
चेतावनी देकर शिक्षकों को अगले साल कार्रवाई के प्रति चेता कर अपना फर्ज निभाती आई हैं। अब प्रदेश की सत्ता पर काबिज नई सरकार ने भी पुरानी सरकारों के नक्शे कदम पर चलते हुए कम परिणाम देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई करने का फैसला वापस ले लिया है।
उच्च शिक्षा निदेशालय के पास पहुंचे आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 396 स्कूलों का इस साल 25 फीसदी से कम परिणाम रहा है। इनमें बारहवीं के 91 और दसवीं के 305 स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा 55 स्कूलों में एक भी विद्यार्थी पास नहीं हुआ है।
बारहवीं के 16 और दसवीं के 39 स्कूलों का परीक्षा परिणाम शून्य रहा है। बारहवीं में कांगड़ा और मंडी से 4-4, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति से 3-3, चंबा और सिरमौर से 1-1 स्कूल ऐसा है, जहां एक भी बच्चा पास नहीं हुआ है।