शिमला। हिमाचल विश्वविद्यालय की हाई पॉवर कमेटी की मंगलवार को नए सत्र को लेकर अहम बैठक बुलाई है। कुलपति की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में विवि के अधिष्ठाता अध्ययन, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, चीफ वार्डन, सुरक्षा अधिकारी और कुलसचिव सहित सभी बड़े अधिकारी शिरकत करेंगे।
बैठक में नए शैक्षणिक सत्र 2019-20 में कैंपस छात्रावासों की व्यवस्थाओं में सुधार के साथ ही कई तरह के अहम मामलों पर चरचा कर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। चरचा यह भी है कि गुप्त रखे बैठक के एजेंडा में नए सत्र में विवि और कॉलेजों में छात्र संघ के गठन को लेकर फैसला लिया जाना संभावित है। चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या 2014 के बाद से अब तक हर सत्र में हो रहे अप्रत्यक्ष चुनावी प्रक्रिया अपनाकर ही एससीए गठन किया जाए, इस चरचा के बाद फैसला लिया जा सकता है। हालांकि प्रत्यक्ष चुनाव बहाल कर चुनाव करवाकर एससीए गठन की संभावनाएं कम नजर आ रही हैं। पहले ही नया शैक्षणिक सत्र करीब 15 से 20 दिन देरी से शुरू हुआ है।
अभी विभागों में कक्षाओं का दौर शुरू हुआ है। ऐसे में यदि प्रत्यक्ष चुनाव करवाने पर फैसला हुआ तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया में 15 से 20 दिन का समय लगना तय है। इससे शैक्षणिक सत्र एक माह लेट हो जाएगा जिसकी भरपाई कर कक्षाओं के लिए तय की लिमिट को पूरा कर पाना विवि के हर विभाग के लिए मुश्किल हो जाएगा। जानकारी के मुताबिक इस हाई पॉवर कमेटी के लिए क्या एजेंडा रहेगा, इसे विवि प्रशासन ने गुप्त रखा है। बावजूद इसके बैठक में हाई पॉवर कमेटी विवि कैंपस, विभागों के साथ छात्रावासों में व्यवस्थागत खामियों को दूर करने, सुरक्षा बंदोबस्त, परिसर में प्रतिबंध के बावजूद छात्र संगठनों की गतिविधियां करने वालों पर और सख्त रुख अपनाने, शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने पर चरचा कर फैसले लिए जा सकते हैं। हाई पॉवर कमेटी अकादमिक मुद्दों पर भी चरचा कर सकती है। इनमें विवि की ऑनलाइन की प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली में पाई जा रही खामियों को दूर करना शामिल है।
2014 से अब तक मेरिट आधार पर किया जा रहा एससीए गठन
शिमला। पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल और पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी के समय में 2014 में प्रत्यक्ष की जगह मेेरिट के आधार पर विवि और इससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में छात्र संघ गठित करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसमें शैक्षणिक, खेलकूद, सांस्कृतिक, रेंजर रोवर और एनसीसी आदि से एससीए में तय संख्या में छात्र प्रतिनिधियों का मनोनयन मेरिट आधार पर किया जाता है। यह प्रक्रिया अब तक जारी है।
छात्र गुटों अब तक जारी है हिंसा
शिमला। प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव होंगे या अप्रत्यक्ष इस पर फैसला हाई पॉवर कमेटी ही लेगी। यह प्रदेश सरकार से मिले संकेत पर निर्भर होता है। प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव पर 2014 में छात्र हिंसा के कारण लगाया गया था। लेकिन इसके बावजूद रुक-रुक कर छात्रों में मारपीट की घटनाएं होती रहीं। कोटशेरा कॉलेज में एसएफआई और एबीवीपी के बीच भी झड़प हो चुकी है। इसके अलावा कई अन्य कॉलेजों में भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।