डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार लगभग 26 वर्ष बाद प्रदेश में फिर से लॉटरी व्यवस्था शुरू करने जा रही है। गंभीर सामाजिक दुष्परिणामों को देखते हुए हिमाचल में लॉटरी बंद की गई थी।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने हिमाचल प्रदेश में लॉटरी दोबारा शुरू करने की प्रदेश सरकार की तैयारी का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार लगभग 26 वर्ष बाद प्रदेश में फिर से लॉटरी व्यवस्था शुरू करने जा रही है। गंभीर सामाजिक दुष्परिणामों को देखते हुए हिमाचल में लॉटरी बंद की गई थी। सरकार को बताना चाहिए कि आज ऐसी कौन-सी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं कि उसी व्यवस्था को वापस लाने की तैयारी की जा रही है।
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गुरुवार को जारी बयान में डॉ. बिंदल ने कहा कि लॉटरी केवल राजस्व अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसका समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी की मानसिकता पर पड़ने वाला प्रभाव भी देखा जाना चाहिए। जब स्कूल से निकलने वाला कोई बच्चा लॉटरी के स्टॉल और उसके प्रचार को देखता है तो उसके मन में बिना परिश्रम के अचानक धनवान बनने की इच्छा पैदा हो सकती है। यही मानसिकता धीरे-धीरे व्यक्ति को मेहनत और सही मार्ग से हटाकर गलत दिशा में ले जा सकती है।
उन्होंने कहा कि जल्दी और आसानी से पैसा कमाने की लालसा किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। इसी सामाजिक खतरे और लॉटरी के दुष्परिणामों को समझते हुए करीब 26 वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने पूरे विवेक के साथ प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था को बंद करने का निर्णय लिया था। डॉ. बिंदल ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि 26 साल बाद सरकार ने ऐसा क्या देख लिया कि लॉटरी दोबारा शुरू करने पर उतारू हो गई है। डॉ. बिंदल ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश सरकार के लॉटरी शुरू करने के निर्णय के पूरी तरह खिलाफ है और इसका पुरजोर विरोध करेगी।