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राजनीति: जयराम ठाकुर बोले- मुख्यमंत्री सुक्खू के झूठ से जनता के साथ कांग्रेस नेता और मंत्री भी परेशान

Thu, 22 Oct 2026 06:21 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, ठियोग/शिमला
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पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर - फोटो : संवाद
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ठियोग विधानसभा क्षेत्र में आयोजित नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह एवं कार्यकर्ता सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने  मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू और प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर जुबानी हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू को पहले से ही कांग्रेस की संभावित हार का पूरा अंदेशा था। यही वजह थी कि आपदा का बहाना बनाकर डिजास्टर एक्ट लागू किया गया और पंचायत चुनावों को टालने के लिए तमाम षड्यंत्र रचे गए, लेकिन भाजपा ने जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां पुरजोर लड़ाई लड़ी, जहां हमने साफ तौर पर कहा कि जब कोविड जैसी भीषण महामारी के दौरान देश में चुनाव आयोजित किए जा सकते हैं, तो फिर अब पंचायत चुनाव करवाने से परहेज क्यों किया जा रहा है, जिसके बाद अंततः सर्वोच्च अदालत ने हमारी बात सुनी और तुरंत चुनाव करवाने के आदेश जारी किए। 

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विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होगा: जयराम
उन्होंने दावा किया कि हालिया पंचायत चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस सरकार को प्रदेश की जनता का मिजाज और स्पष्ट रुख दिखा दिया है और अब आने वाले विधानसभा चुनाव में भी हिमाचल की जनता कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ा साफ करके राज्य में भाजपा की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनाएगी।  ठियोग के स्थानीय मुद्दों को रेखांकित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान ठियोग में जनहित के लिए जो भी संस्थान खोले गए थे, वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही उन सभी संस्थानों को राजनीतिक द्वेष के चलते ताला लगा दिया और बंद कर दिया, जबकि सच यह है कि मुख्यमंत्री लगातार सदन के अंदर और बाहर जनता से झूठ बोलते आ रहे हैं और गारंटियों के नाम पर छलावा कर रहे हैं। विधानसभा क्षेत्रों को जोड़तोड़ कर जिले बनाने का प्रयास किया तो भाजपा सरकार बनते ही इसकी भी समीक्षा की जाएगी। 

मुख्यमंत्री अपनी हार का ठीकरा मंत्रियों पर मढ़ रहे: जयराम
जयराम ठाकुर ने कहा कि पंचायत चुनाव में हुई करारी हार के बाद मुख्यमंत्री को कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली तलब किया था, क्योंकि वह प्रदेश के इतिहास में ऐसे पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं जिनके कार्यकाल में पार्टी को इतनी शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। इसलिए अब मुख्यमंत्री जी को बैलेट पेपर और ईवीएम पर बेवजह सवाल उठाना बंद कर देना चाहिए। मंत्री उनके कामकाज के तौर तरीकों को पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव हारने का कारण हाईकमान को बता रहे हैं और मुख्यमंत्री अपनी हार का ठीकरा मंत्रियों पर मढ़ रहे हैं। ये भी सच्चाई है कि कुछ मंत्री मुख्यमंत्री को ही बदलने के लिए हाईकमान के पास दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को समझ जाना चाहिए ही कांग्रेस पार्टी में आपके नेतृत्व को लेकर ही अविश्वास का वातावरण है।  इस दौरान भाजपा के सांसद अनुराग ठाकुर और सुरेश कश्यप सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता व भारी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रदेश में कांग्रेस की विदाई और भाजपा की होगी वापसी : श्रीकांत
भाजपा प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की विदाई होगी और भाजपा फिर से सत्ता में आएगी। पूह मंडल की संगठनात्मक बैठक को नाको में संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल में कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता में व्यापक असंतोष है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आम जनता विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है। युवा रोजगार के अवसरों को लेकर चिंतित है, कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर परेशान हैं और किसान-बागवान भी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। विमल नेगी मौत मामले को लेकर कहा कि इस प्रकरण ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले में प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े पहलुओं को दबाने के प्रयासों की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शर्मा ने बूथ सशक्तिकरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि अपना बूथ, सबसे मजबूत केवल एक नारा नहीं, बल्कि संगठन की कार्यप्रणाली का मूल आधार है। श्रीकांत शर्मा ने शिपकी ला बॉर्डर का दौरा कर देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात जवानों से मुलाकात की। शर्मा ने कहा कि हमारे वीर जवानों के त्याग, पराक्रम और अटूट संकल्प के कारण ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं।
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कागजों पर काम दिखा निकाले पैसे, हिसाब दे कांग्रेस सरकार : जमवाल
 भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और विधायक त्रिलोक जमवाल ने पीडीएनए फंड के उपयोग को लेकर कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाए हैं। जमवाल ने कहा कि कुछ स्थानों पर जहां भूस्खलन हुआ ही नहीं, वहां कागजों में स्लिप दिखाकर टेंडर बनाए गए और बिना पर्याप्त काम के बिलों का भुगतान करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। केंद्र सरकार ने 18 जून 2025 को वर्ष 2023 की आपदा के बाद प्रदेश के लिए 2,006.40 करोड़ रुपये की पुनर्निर्माण योजना स्वीकृत की, इसमें केंद्रीय हिस्सा 1,504.80 करोड़ था। पहली केंद्रीय किस्त के रूप में 451.44 करोड़ जारी किए गए। उन्होंने कहा कि 13 जनवरी 2026 के सरकारी आदेश के अनुसार दूसरी किस्त में विभिन्न विभागों के लिए 753.29 करोड़ स्वीकृत हुए, जिसमें 564.97 करोड़ केंद्रीय और 188.32 करोड़ राज्य हिस्सा दर्शाया गया है। अकेले लोक निर्माण विभाग को 487.80 करोड़, जल शक्ति विभाग को 176.48 करोड़, कृषि विभाग को 29.13 करोड़ और बिजली बोर्ड को 18.22 करोड़ स्वीकृत किए गए। जमवाल ने सवाल किया कि जब सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण के लिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत हुई, तो आज भी अनेक सड़कें बदहाल क्यों हैं। त्रिलोक जमवाल ने कहा कि सरकारी आदेश में स्पष्ट निर्देश हैं कि पीडीएनए का पैसा केवल 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त और स्वीकृत परिसंपत्तियों पर खर्च होगा। नियमों से बाहर खर्च की व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित स्वीकृति अधिकारियों की होगी। उन्होंने कहा कि आदेश में मार्च 2026 तक धनराशि उपयोग करने और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाने के निर्देश थे। मुख्यमंत्री बताएं कि कितने कार्य पूरे हुए, कितने बिल पास हुए और कितने कार्यों की जांच हुई।
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